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यह कानून देश के संविधान और एकता को तोड़ने वाला है :मौलाना महमूद मदनी

यह कानून देश के संविधान और एकता को तोड़ने वाला है :मौलाना महमूद मदनी



  • जमीयत उलेमा ए हिंद के नेतृत्व में देश के हज़ारों शहरों में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ धरना और प्रदर्शन ।


नई दिल्ली :- विवादित नागरिकता संशोधन बिल 2019 के लोकसभा और राज्यसभा से मंज़ूरी के खिलाफ़ आज जमीयत उलेमा ए हिंद की विभिन्न यूनिटों की ओर से देश भर में लगभग 2000 से अधिक शहरों में विरोध प्रदर्शन किए गए।

नई दिल्ली में जंतर मंतर पर हुए विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व महासचिव जमीयत उलेमा ए हिंद मौलाना महमूद मदनी ने किया।

आज देश भर के बहुत सारे बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, जयपुर , बेंगलुरु ,हैदराबाद, विजयवाड़ा,  नलगुंडा , पश्चिमी बंगाल गोदावरी, कोलकाता ,भोपाल ,अहमदाबाद पुणे, सूरत, चंडीगढ़, बनारस, कानपुर, देवबंद, लखनऊ, ग्वालपाड़ा ,अगरतला इत्यादि में भी हज़ारों हज़ार प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न प्ले कार्ड और ज़ोरदार नारों के माध्यम से अपने गुस्से और विरोध को प्रकट किया। इस अवसर पर लोगों ने जो प्लेकार्ड अपने हाथों में उठा रखे थे उन पर बहुत सारे नारे लिखे हुए थे जिनमें संविधान बचाओ, नागरिकता कानून वापस लो, धार्मिक भेदभाव बर्दाश्त नहीं, कैब बंटवारे की साज़िश है, एक मुल्क़  एक  कौम। हम इस फासीवादी कानून की निंदा करते हैं। कैब भारत के ख़िलाफ़ साज़िश ,आदि आदि।

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि यह कानून देश के संविधान के ख़िलाफ़ और देश तोड़ने वाला है। हम इसको मुसलमानों के खिलाफ़ नहीं बल्कि देश के खिलाफ़ समझते हैं । उन्होंने कहा कि मैं नौजवानों से कहता हूं कि शांति और सद्भाव कायम रखें । हम बुजदिल नहीं हैं और जिसके सीने में ईमान है वह भी  बुजदिल नहीं  होता । लेकिन मुसलमान एक जिंदा कौम हैं और जिंदा कोमों को परेशानियां होती ही हैं मगर वह इस परेशानी से निकलने का मार्ग भी निकालती हैं । मौलाना मदनी ने कहा कि आज जमीयत उलेमा ए हिंद के नेतृत्व में पूरे देश में लगभग 2000 शहरों और हज़ारों कस्बों देहातों में विरोध हो रहा है ।

यहां दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर पुलिस ने लोगों को रोक रखा है मुझे यहां आने में एक घंटा लग गया । हम आपसे सिर्फ इतना कहते हैं कि सम्मान पूर्वक जीवन गुजारने के लिए साहस, विश्वास और निर्भीकता के साथ-साथ सब्र और बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन आवश्यक है ।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जमीयत उलेमा ए हिंद के सेक्रेटरी मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी ने कहा कि कुछ लोग यह कह रहे हैं कि बिल पास हो गया है , अब प्रदर्शन से कोई लाभ नहीं है , मैं कहता हूं कि अब तो लड़ाई की शुरुआत हुई है। दूसरी बात यह है कि मुसलमान कभी लाभ और हानि का हिसाब करके हक के लिए आवाज़ बुलंद नहीं करते बल्कि वह इसलिए ऐसा करते हैं क्योंकि उनका ईमान उन्हे हक बोलने का हुक्म देता है । उन्होंने कहा कि देश के संविधान की लड़ाई इस समय की वक्ती लड़ाई नहीं बल्कि इसके लिए लगातार संघर्ष की आवश्यकता है । इस अवसर पर देशभर में विरोध प्रदर्शनों और सभाओं के बाद, जिला अधिकारी, एसडीएम के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के नाम एक मेमोरेंडम भी दिया गया है। दिल्ली में विधिवत यह मेमोरेंडम दिया गया है.


  •  जमीअत उलमा हिंद के माध्यम से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि..


  1.  हम, जमीयत उलमा-ए-हिंद के सदस्य और समर्थक विनम्रतापूर्वक महामहिम का ध्यान ‘‘नागरिकता संशोधन विधेयक 2019’’ की ओर दिलाना चाहते हें जोकि प्रत्यक्षतः सांप्रदायिकता से प्रेरित है हम इस क़ानून की निन्दा करते है क्योंकि यह विधेयक भारत की नागरिकता के लिए धर्म को कानूनी आधार बनाता है। इसका उद्देश्य तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़गानिस्तान से आने वाले उत्पीडित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता देना बताया गया है लेकिन यह विधेयक धर्म के आधार पर उनमें भेदभाव करता है। इस से धर्म के आधार पर नागरिकता को विभाजित करने की मंशा स्पष्ट प्रतीत होतर है। इस तरह यह देश के बहुलवादी ताने-बाने का उल्लंघन करता है।
  2. हमारे देश का चित्र जो हमारे स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र के निर्माताओं के विचारों और हमारे संविधान में निहित उसूलोें से निकला है, वह एक ऐसे देश का है जो सभी धर्मों के लोगों के साथ समान व्यवहार करने पर वचनबद्ध है। संबंधित बिल में नागरिकता के लिए एक मानदंड के रूप में धर्म का उपयोग देश केे इस इतिहास में विराम को चिन्हित करेगा जो कि कट्टरपंथ पर आधारित है। यह विराम संविधान की मूल भावना और संरचना के साथ असंगत होगा।
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में हर व्यक्ति को क़ानून के सामने समानता दी गई  है और राज्य को किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके धर्म, जाति या पंथ के आधार पर क़ानून के सामने भेदभाव करने से रोका गया है। ऐसा करना समानता के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित यह विधेयक संविधान की भावना और इसकी मूल संरचना का उल्लंघन करता है।
  4. यह बिल असम समझौते 1985 का भी उल्लंघन करता है जो असम में अवैध रूप से आ बसने वाले विदेशियों का पता लगाने के लिए कट-ऑफ तारीख के रूप में 25.03.1971 तय करता है। इस प्रकार मनमाने ढंग से इस समझौते की अनदेखी से उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल में खलल पड़ रहा है।
  5. हम इस असंवैधानिक और अमानवीय बिल को अस्वीकार करते हैं और अपने महान देश के सभी न्याय-प्रेमी और धर्मनिरपेक्ष नागरिकों से अपील करते हैं कि वे सामूहिक रूप से शांतिपूर्ण तरीक़ें से अपनी आवाज उठाएं और इसके क्रियान्वयन को रोकने के लिए हर संभव कानूनी तरीके से इस का विरोध करें।
  6. हम भारत के माननीय राष्ट्रपति से अपील करते हैं कि वे इस कानून के माध्यम से लोगों के साथ अन्याय और सांप्रदायिकता के लक्ष्य को रोकने के लिए अपने गरिमापूर्ण पद के प्रभाव का उपयोग करें। हम भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय से भी अपील करते हैं कि वह निंदनीय कानून का स्वंय संज्ञान ले, जिस के लागू हो जाने से संविधान की मूल संरचना नष्ट हो जाएगी।

जंतर मंतर नई दिल्ली के प्रदर्शन का प्रबंध  जमीयत उलेमा ए दिल्ली ने किया था । इस अवसर पर जमीयत उलमा ए दिल्ली राज्य के सभी पदाधिकारी मौजूद थे । कई  सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जमीयत उलेमा के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया और सभा को संबोधित किया । इसी तरह पूरे देश में लोगों ने जुमे के बाद सड़क पर निकलकर या इकट्ठा होकर इस बिल का विरोध किया ।

इस्लामपुर पश्चिमी बंगाल में जमीअत उलमा ए हिंद के सचिव  मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने शिरकत की। जबकि कोलकाता में मौलाना सदीकउल्ला चौधरी, पटना में मौलाना मोहम्मद नाज़िम, किशनगंज में मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी, मौलाना जावेद इक़बाल,

 कानपुर में मौलाना मतीनउल हक ओसामा जयपुर में मौलाना शब्बीर अहमद कासमी, अहमदाबाद में प्रोफेसर निसार अहमद अंसारी , मुफ्ती असजद कासमी, हैदराबाद में हाफिज पीर शब्बीर अहमद, मुंबई के आजाद मैदान में मौलाना हाफ़िज़ नदीम सिद्दीकी, बेंगलुरु में मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी, मुफ्ती शमसुद्दीन बिजली लखनऊ में सैयद हसीन अहमद , भोपाल में कलीम अहमद, चेन्नई में मुफ्ती मंसूर अहमद , हाजी मोहम्मद हसन ,अगरतला में मुफ्ती अब्दुल मोमिन, चंडीगढ़ में मौलाना अली हसन मजाहीरी , मेवात में मौलाना याहिया करीमी, जाजपूरा , उड़ीसा में मौलाना मोहम्मद जाबिर, रांची में मौलाना अबू बकर कासमी, देहरादून में मौलाना आरिफ कासमी, मौलाना हारून कैराना यूपी में मौलाना मोहम्मद आकिल, सहारनपुर में मौलाना मोहम्मद मदनी, मौलाना जहूर कासमी और जहीन अहमद में नेतृत्व किया।
अयोध्या मामला पर बोले अरशद मदनी हमें अदालत पर पूरा विश्वास है,हम न्याय चाहते हैं,और फैसला सबूत के आधार पर होगा.

अयोध्या मामला पर बोले अरशद मदनी हमें अदालत पर पूरा विश्वास है,हम न्याय चाहते हैं,और फैसला सबूत के आधार पर होगा.


नई दिल्ली :- सुप्रीम कोर्ट में आज राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आवेदक गोपाल सिंह ने कोर्ट से कहा कि इस मुद्दे में मध्यस्थता काम नहीं कर रही है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को ही कोई निर्णय सुनाना चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि हम मध्यस्थता का समय दिया, उसकी रिपोर्ट आने में अभी समय है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

न्यूज़ 18 उर्दू के अनुसार जमीअत के सदर मोलाना सैयद अरशद मदनी ने आज कानूनी प्रगति पर अपने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम तो शुरू से चाहते हैं कि अदालत इस मामले में अपना फैसला दे, लेकिन जब अदालत सामंजस्य द्वारा इसका समाधान चाहती थी और इसके लिए औपचारिक तौर पर सुलह कारों का एक पैनल भी स्थापित कर दिया था इसलिए अदालत की इच्छा का सम्मान करते हुए हम सामंजस्य कारों के साथ सहयोग किया और उनके सामने अपना पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि हम अदालत का न केवल सम्मान करते हैं बल्कि उस पर भरोसा भी करते हैं हम न्याय चाहते हैं और हमें विश्वास है कि अदालत बस आस्था के आधार पर कोई फैसला नहीं करेगी बल्कि इसका फैसला सबूत के आधार पर होगा।
जमीअत का विशाल शताब्दी समारोह देवबंद में नवंबर २०२० में मनाया जाएगा.

जमीअत का विशाल शताब्दी समारोह देवबंद में नवंबर २०२० में मनाया जाएगा.



  • मोबलीचिंग  जैसी अमानवीय घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली में 4 अगस्त को जमीअत का 
  • ऐतिहासिक  सम्मलेन 


नई दिल्ली :- जमीयत उलेमा ए हिंद के शताब्दी वर्ष समारोह की तैयारियों के संबंध में आज मदनी हाल कार्यालय जमीयत उलेमा ए हिंद में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद ने की, बैठक में संस्था के सभी राज्यों के अध्यक्षों और  महा सचिवो ने भाग लिया जिन्होंने जमीयत के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह के आयोजनों का जायजा लिया और भविष्य में आयोजित होने वाले प्रोग्रामों को सफल, प्रभावशाली और संदेश जनक बनाने के कार्यक्रम पर विचार किया. विशेषकर देवबंद में आयोजित होने वाले विशाल शताब्दी वर्ष समारोह से संबंधित कई मामलों पर विशेष चर्चा की.
 इस अवसर पर संबोधित करते हुए मौलाना महमूद मदनी जनरल सेक्रेट्री जमीयत उलेमा ए हिंद ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद का 100 साल का इतिहास पूरे देश और मिल्लत इस्लामिया का इतिहास है जिससे न सिर्फ हमारा संघर्ष, कुर्बानियां और उपलब्धियां जुड़ी हुई हैं बल्कि नई पीढ़ी के लिए इसमें मार्गदर्शन भी है. इसलिए इस बात की आवश्यकता है कि शताब्दी समारोह के आयोजन और प्रोग्रामों को जिला और राज्य स्तर पर भी आयोजित किये जाएं और जमीयत उलेमा हिंद के महापुरुषों पर और ज्यादा सेमिनार और कान्फ्रेंस आयोजित करके जमीयत के संदेश को अधिक  सार्वजनिक किया जाए.

 इसलिए पूरे विचार करने के बाद तय हुआ कि देवबंद में  विशाल शताब्दी वर्ष का समारोह २०, २१, २२ नवंबर 2020 को आयोजित किया जाए और इससे पहले सारे राज्यों  की जमीयत अपने-अपने क्षेत्रों में जमीयत से जुड़े हुए महापुरुषों पर सेमिनार और प्रोग्राम आयोजित करें दूसरी ओर जहां जमीयत के महापुरुषों पर सेमिनारों का सिलसिला जारी है वहीं यह भी निर्णय किया गया कि महापुरुषों पर डॉक्यूमेंट्री भी तैयार कराई जाए, जहां तक सेमिनार का संबंध है तो 27 - 28 जुलाई 2019 को दिल्ली में हजरत मौलाना अहमद सईद देहलवी रहमतुल्लाह   पूर्व अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद और मौलाना हिफजुर रहमान स्योहारावी  पूर्व महासचिव जमीयत उलेमा ए हिंद की सेवाओं पर सेमिनार  आयोजित हो रहा है,  इसके अलावा 21 -22 सितंबर 2019 को हजरत मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली रह संस्थापक जमीअत उलेमा ए  हिंद मौलाना मुफ्ती किफायतुलला पूर्व अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद, हजरत अल्लामा सैयद फखरुद्दीन मुरादाबादी की सेवाओं पर सेमिनार आयोजित होगा बैठक में यह प्रस्ताव आया कि हजरत शेखउल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी, हजरत शेख उल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी, हजरत मौलाना सनाउल्लाह अमृतसरी,

 हजरत मौलाना अब्दुल वहाब आरवी  और फिदा ए मिल्लत हजरत मौलाना असद मदनी पर एक कान्फ्रेंस दिल्ली में नवंबर के महीने में आयोजित की जाए इसके अलावा हजरत अल्लामा शाह मोइनुद्दीन अजमेरी पूर्व उपाध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद पर अजमेर शरीफ में सेमिनार आयोजित किया जाए. बैठक में शताब्दी वर्ष समारोह को सफल बनाने के लिए भी कई निर्णय लिए गए विशेषकर आर्थिक कमेटी गठित की गई जिसके कन्वीनर मौलाना नदीम सिद्दीकी महाराष्ट्र होंगे कमेटी में मौलाना बदरुद्दीन अजमल कासमी, मौलाना सिद्दीकुल्लाह   चौधरी, हाजी मोहम्मद हारुन भोपाल, मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना रफीक अहमद बडोदवी, मुफ्ती अहमद देवला शामिल हैं यह भी तय हुआ कि मौलाना हकीमुद्दीन कासमी शताब्दी वर्ष समारोह के सहयोगी कन्वीनर होंगे और देवबंद में शताब्दी वर्ष समारोह संपर्क कार्यालय भी स्थापित होगा. स्पष्ट रहे कि मुफ्ती मोहम्मद अफफान  मंसूरी शताब्दी समारोह के कन्वीनर हैं.

 बैठक में इसके अलावा देश के वर्तमान हालात  विशेषकर मॉब लिंचिंग जैसी अमानवीय घटनाओं पर भी चर्चा हुई सांप्रदायिक तत्व जिस तरह से भय और घृणा का वातावरण पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं उसने देश की पहचान को बुरी तरह से प्रभावित किया है यह महसूस किया जा रहा है कि अल्पसंख्यकों का एक बड़ा वर्ग बेचैन और भयभीत है, ऐसे हालात में जमीयत उलेमा ए हिंद इस कार्य को आवश्यक समझती है कि वह आपसी एकता शांति और भाईचारा को बढ़ावा देने के लिए अपनी परंपराओं के अनुसार व्यवहारिक रूप से सरगरम हो और न्याय प्रिय व प्रभावशाली देशवासियों के साथ मिलकर आपसी विश्वास का वातावरण स्थापित किया जाए इसी उद्देश्य के अंतर्गत 4 अगस्त 2019 को दिल्ली में शांति व एकता सम्मेलन के आयोजन का निर्णय लिया गया है इससे पहले 3 अगस्त को दिल्ली में जमीयत उलेमा ए हिंद की कार्यकारिणी का सम्मेलन होगा यह भी निर्धारित हुआ है कि ना सिर्फ दिल्ली में बल्कि मुंबई औरंगाबाद भोपाल जयपुर लखनऊ देहरादून पटना सहित बड़े शहरों में यह सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे
म्हणून 'तिने' स्वत:शीच लग्न केलं!

म्हणून 'तिने' स्वत:शीच लग्न केलं!


लंडन :- तरूण मुलींसमोर भारतात आणि इतर अनेक देशांमध्ये कायम करिअर आणि लग्न यापैकी एक पर्याय ठेवला जातो. अनेक मुली लग्नाचा पर्याय निवडून शिक्षण अर्धवट सोडून देतात. पण एक मुलगी अशी आहे जिने शिक्षणाच्या मार्गात कोणताच अडथळा यायला नको म्हणून स्वत:शीच लग्न केलंय.

स्वत:शीच लग्न करणाऱ्या या मुलीचं नाव आहे जेमिमा. जेमिमा ही युगान्डाची रहिवाशी असून सध्या ऑक्सफर्डमध्ये शिक्षण घेते आहे. ३२ वर्षांच्या जेमिमा मागे आई-वडिलांनी लग्नासाठी तगादा लावला होता. पण जेमिमाला लग्न करण्याची अजिबात इच्छा नव्हती. तिला संपूर्ण लक्ष तिच्या शिक्षणावर केंद्रित करायचं होतं. आई वडिलांचा लग्नाचा हट्ट आणि शिक्षणाची आकांक्षा अशा कात्रीत सापडलेल्या जेमिमाने एक तिसराच मार्ग निवडला.

तिने लग्नाची पत्रिका छापली. लंडनमधल्या आपल्या सगळ्या मित्रांना लग्नाला बोलावलं. इंग्लंडमधील परंपरेप्रमाणे लग्नासाठी दुचाकी गाडीही बोलावली. सगळे मित्र लग्नाला आले. पण लग्नात नवरदेव कुठेच नव्हता. अखेर ख्रिस्ती पद्धतीने स्वत:शीच लग्न केलं तेव्हा सगळे पाहून चाटच झाले. 'मी माझ्यासोबत आयुष्यभर राहीन' अशी शपथही तिने घेतली.

मी स्वत:साठी कशी सुयोग्य वर आहे याविषयावर लग्नानंतर तिने छोटसं भाषणही दिलं. लग्नाचं समारंभ संपल्यावर तिच्या मित्रांनी तिची योग्यप्रकारे पाठवणीही केली. जेमिमाच्या या लग्नामुळे तिचे आई-वडिल खुश झाले की नाही माहित नाही.पण सोशल मीडियावर मात्र जेमिमा सुपरहिट झाली आहे. तिच्या लग्नाचे फोटो आणि व्हिडिओ सध्या सोशल मीडियावर व्हायरल झाले आहेत

सध्या युरोपमध्ये स्वत:शीच लग्न करण्याचा ट्रेन्ड आला आहे. या लग्नांना सोलोगामी म्हटलं जातं. आई-वडिलांचा त्रास नको आणि कोणी पार्टनरही नको म्हणून लोक अशा प्रकारची लग्न करत आहेत.

दाऊद इब्राहिमचा 'हा' हस्तक भारतीय, पाकला झटका

दाऊद इब्राहिमचा 'हा' हस्तक भारतीय, पाकला झटका


बँकॉक :- अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिमचा एक जवळचा हस्तक पाकिस्तानी नसून भारतीय नागरिक असल्याचा निर्णय थायलंडच्या एका न्यायालयाने दिला आहे. सय्यद मुजक्किर मुद्दसर हुसैन ऊर्फ मोहम्मद सलीम ऊर्फ मुन्ना झिंगडा डी कंपनीचा एक महत्त्वाचा भाग आहे आणि दाऊद इब्राहिम आणि छोटा शकीलचा जवळचा आहे. पाकिस्तानला या न्यायालयाच्या निर्णयामुळे मोठा झटका बसला आहे.

मुन्ना झिंगडा बनावट पाकिस्तानी पासपोर्टवर बँकॉकला गेला होता. २००० सालापासून तो तेथील तुरुंगात आहे. त्याच्यावर दाऊदचा शत्रु छोटा राजनच्या हत्येचा कट रचण्याचा आरोप आहे. झिंगडाच्या पिता मुद्दसर हुसैन याचा १९९३ च्या मुंबई बॉम्बस्फोटात महत्त्वाचा सहभाग होता. त्याला पाकिस्तानची गुप्तचर संस्था ISI चं संरक्षण मिळालं आहे. थायलंडमधील पाकिस्तानी दूतावासाच्या माध्यमातून झिंगडाची शिक्षा कमी करण्याचे प्रयत्न करण्यात आले, त्यातही पाकिस्तान यशस्वी ठरलं. मुन्ना झिंगडाची शिक्षा यापूर्वीच कमी करून ३४ वर्षं करण्यात आली आहे.

यानंतर पुन्हा २०१६ मध्ये मुन्ना झिंगडाची शिक्षा कमी होऊन १८ वर्षांपर्यंत आली आहे. पाकिस्तानी अधिकारी शिक्षा कमी करण्याचे प्रयत्न एकीकडे करत असतानाच थायलंडसोबत प्रत्यार्पण करारांतर्गत मुन्नाच्या प्रत्यार्पणाचेदेखील प्रयत्न करत होते. पण भारताने याचा तीव्र विरोध करत मुन्ना झिंगडाच्या प्रत्यार्पणाचा दावा केला. हे प्रकरण अलीकडेच थायलंड कोर्टात पोहोचलं होतं.

दरम्यानच्या काळात, थायलंडच्या कायद्यानुसार, झिंगडाची सर्व शिक्षा माफ झाली आणि डिसेंबर २०१६ मध्ये त्याची सुटका होणार होती, पण हे प्रकरण विचाराधीन असल्याने त्याच प्रत्यार्पण झालं नाही. बुधवारी, कोर्टाने भारतातर्फे दिल्या गेलेल्या बोटांच्या ठशांच्या नमून्यांच्या आधारे झिंगडा भारतीय नागरिक असल्यावर शिक्कामोर्तब केले.

कोर्टाने पाकिस्तानलाही आपल्या थायलंडमधील दूतावासामार्फत या प्रकरणाचे पुरावे जमा करण्यास सांगितले आहेत. पाकिस्तानकडे अपील दाखल करण्यासाठी ३० दिवसांची मुदत आहे. अपील न केल्यास ९० दिवसांच्या आत झिंगडाला भारत प्रत्यार्पित करेल.

कोर्टात हाय व्होल्टेज ड्रामा

या प्रकरणाच्या सुनावणीदरम्यान कोर्टरुममध्ये नाट्यमय घटना घडल्याचे वृत्त आहे. निर्णय येताच झिंगडाने न्यायाधीशांना अपशब्द सुनावले. इतकेच नव्हे तर पाकिस्तानी दूतावासाच्या अधिकाऱ्यांनीही राग व्यक्त केला.
... म्हणून पासवानांनी मोदींविरोधात दंड थोपटले

... म्हणून पासवानांनी मोदींविरोधात दंड थोपटले




नवी दिल्ली :- शिवसेना आणि जेडीयूपाठोपाठ केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान यांच्या नेतृत्वाखालील लोकजनशक्ती पार्टीने केंद्रातील नरेंद्र मोदी सरकारविरोधात दंड थोपटले आहेत. सर्वोच्च न्यायालयाच्या माजी न्यायाधीशाला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरणाच्या अध्यक्षपदी म्हणून नियुक्त केल्याबद्दल लोजपाने विरोध केला आहे. एससी-एसटी कायदा कमकुवत केल्यामुळेच या न्यायाधीशाची राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरणाच्या अध्यक्षपदी नियुक्ती केल्याचा आरोप करत त्यांना या पदावरून हटविण्याची मागणी लोजपाने केली आहे.
रामविलास पासवान यांचे चिरंजीव चिराग पासवान यांनी पत्रकार परिषद घेऊन ही मागणी केली आहे. 'सर्वोच्च न्यायालयाचे माजी न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल यांनी एससी, एसटी अॅक्ट कमकुवत केला. त्यामुळेच निवृत्तीनंतर केंद्र सरकारने त्यांना बक्षिसी म्हणून न्यायाधिकरणाच्या अध्यक्षपदी नियुक्त केले आहे. त्यामुळे गोयल यांना अध्यक्षपदावरून तत्काळ हटविण्यात यावे. तसेच अध्यादेश काढून एससी-एसटी अॅक्ट पूर्ववत करावा. आमच्या या मागण्या मान्य न केल्यास येत्या ९ ऑगस्टपासून लोजपा आंदोलन करेल,' असा इशारा चिराग पासवान यांनी दिला आहे.
'गोयल यांना हटविण्यासाठी ९ ऑगस्ट रोजी दलित संघटनांकडून देशव्यापी निदर्शने करण्यात येणार आहेत. २ एप्रिल रोजी झालेल्या 'भारत बंद' पेक्षाही ही निदर्शने तीव्र असतील,' असा इशारा त्यांनी दिला. 'काही मुद्द्यांवर आम्ही भाजपला पाठिंबा दिला आहे. टीडीपीसारखं आम्ही एनडीएतून बाहेर पडणार नाही. आम्ही सरकारमध्ये राहून दलितांच्या हितासाठी आवाज उठवत राहू. आमच्या संयमाची परीक्षा पाहू नये. पंतप्रधानांनी त्यावर त्वरीत निर्णय घ्यावा,' असंही पासवान म्हणाले.
दरम्यान, पासवान यांच्या पाठोपाठ केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले यांनी गोयल यांना अध्यक्षपदावरून हटविण्याची मागणी केली आहे. याबाबत मोदींशी बोलणार असल्याचंही त्यांनी सांगितलं.

चीन, इराण आणि सौदी पाकचे खास मित्रः इम्रान

चीन, इराण आणि सौदी पाकचे खास मित्रः इम्रान



इस्लामाबाद :- पाकिस्तानच्या निवडणुकीत मोठा विजय मिळाल्यानंतर 'पाकिस्तान तहरिक-ए-इन्साफ'चे प्रमुख इम्रान खान यांनी परराष्ट्र धोरणाविषयी आपलं मत व्यक्त करायला सुरुवात केली आहे. भारतासोबत चांगले संबंध असायला हवे असे, इम्रान यांनी म्हटलं असलं तरी चीन, इराण आणि सौदी अरब हे पाकिस्तानचे 'खास' मित्र असणार आहेत, असे स्पष्ट संकेत त्यांनी एका पत्रकार परिषदेत दिले. 
पाकिस्तानमधील नवनिर्वाचित सरकार हे चीन, सौदी अरब आणि इराण या देशांसोबतचे संबंध अधिक मजबूत करण्यासाठी प्रयत्नशील राहील. पाकिस्तानला सध्या इतर देशांच्या तुलनेत सर्वात जास्त शांततेची गरज आहे. देशात शांतता नांदावी यासाठी पाकिस्तानला अमेरिकेची गरज नाही. अमेरिकेसोबतच्या चांगल्या संबंधासाठी पाकिस्तानला आशा आहे. परंतु, हे एकतर्फी नको, दोन्ही बाजुंनी व्हायला हवे, असे ते म्हणाले. 
भारतासोबतच्या संबंधाबद्दल बोलताना ते म्हणाले, पाकिस्तानात काहीही चुकीचे झाले तर त्यासाठी भारत जबाबदार आहे. याप्रमाणे हा आरोप भारत पाकिस्तानवर करतोय. या ब्लेम गेममध्ये कोणालाच फायदा मिळणार नाही. दोन्ही देशांतील चांगल्या संबंधासाठी हा मार्ग योग्य नाही. त्यासाठी दोन्ही देशांनी प्रयत्न करायला हवेत. चीनसोबत असलेले संबंध अधिक दृढ करण्यात येतील. गरीबी आणि भ्रष्टाचाराविरोधात कसे लढायचे हे आम्ही चीनकडून शिकू, असंही ते एका प्रश्नाला उत्तर देताना म्हणाले. सौदी अरब हा अडचणीच्या वेळी मदत करणारा पाकिस्तानचा खरा मित्र आहे, अशा शब्दात इम्रान खान यांनी सऊदीसोबतचे संबंध अधिक दृढ राहणार असल्याचे स्पष्ट संकेत दिले आहेत. 

डॉक्टरांना सापडला देशातील नवा रक्तगट

डॉक्टरांना सापडला देशातील नवा रक्तगट




मणिपाल :- कर्नाटकमधील कस्तुरबा हॉस्पिटलच्या डॉक्टरांनी एका अतिशय दुर्मिळ रक्तगटाचा शोध लावला आहे. या रक्तगटाचे नाव पीपी किंवा पी नल फोनोटाइप असे आहे. ज्या रुग्णाचा हा रक्तगट आहे, तो रुग्ण हा रक्तगट असणारी देशातील पहिली आणि एकमेव व्यक्ती ठरली आहे.
डॉक्टरांनी याबाबत सांगितले की, एका रुग्णाला तत्काळ रक्त चढवण्याची गरज होती. कस्तुरबा हॉस्पिटलच्या रक्तपेढीत रुग्णाच्या रक्ताचा नमूना घेतला गेला. त्या रुग्णाचा रक्तगट कोणता हे पाहण्यासाठी डॉक्टरांनी नमून्याची तपासणी केली. मात्र त्यांना रक्तगट ओळखता आला नाही. डॉक्टरांनी एक-दोनदा नव्हे, तर तब्बल ८० वेळा रक्ताच्या नमून्याची तपासणी केली, तरी देखील त्याचा रक्तगट कोणता हे समजू शकले नाही. डॉक्टरांना याचे आश्चर्य वाटले. इतकेच नाही, तर त्या रुग्णाला एखादा रक्ताशी संबंधित आजार आहे का यासाठीही विस्ताराने तपासणी केली गेली. या कामासाठी डॉक्टरांची मोठी टीमच कामाला लागली होती. मात्र त्यांना काहीही समजू शकले नाही. 
शेवटी डॉक्टरांनी रुग्णाच्या रक्ताचा नमूना आंतरराष्ट्रीय ब्लड ग्रूप रेफरन्स लॅबॉरेटरीमध्ये (IBGRL) ब्रिस्टल येथे (यूके) तपासणीसाठी पाठवले. तिथे तापसाणीत या रुग्णाच्या रक्तात पीपी फेनोटाइप सेल्स असल्याचे आढळले.
आरोग्य विज्ञान मणिपाल अकादमी उच्च शिक्षणाचे प्र-कुलगुरू डॉ. पूर्णिमा बलिगा यांनी सांगितले की, भारतात असा रक्तगट सापडणे ही पहिल्यांदाच घडलेली घटना आहे. हॉस्पिटलच्या ब्लड बँक विभागाने केलेल्या कामगिरीची डॉ. बालिगा यांनी प्रशंसा केली आहे.
या रुग्णाच्या शरीरात अतिशय दुर्मिळ असा रक्तगट पी नल आणि अँटी पीपी १ पीके अँटी बॉडी रक्त सापडले आहे, असे इम्युनो हेमेटॉलॉजी अँण्ड ब्लड ट्रान्स्फ्यूजन डिपार्टमेंटचे प्रमुख प्राध्यापक शामी शास्त्री यांनी सांगितले. तथापि, रुग्णाच्या रक्तगटाचे रक्त न सापडल्याने अस्थिरोग विशेषज्ज्ञ प्राध्यापक किरण आचार्य यांच्या टीमने रुग्णाची सर्जरी ब्लड ट्रान्स्फ्यूजनविनाच केली.रुग्णाचे हिमोग्लोबीन वाढल्यानंतर त्याला दुसरी औषधे दिली जातील असेही शास्त्री यांनी सांगितले. 

स्विस बँकेतील 'ते' ३०० कोटी रुपये कुणाचे?

स्विस बँकेतील 'ते' ३०० कोटी रुपये कुणाचे?



नवी दिल्ली :- स्विस बँकेतील काळ्या पैशांवरून भारतात सत्ताधारी आणि विरोधक यांच्यात सतत आरोप-प्रत्यारोप होत असतो. परंतु, स्विस बँकेत काही खाती निष्क्रिय असून यातील ३०० कोटी रुपये कुणाचे आहेत, हे सांगण्यासाठी अद्याप कुणीही समोर आला नाही. गेल्या तीन वर्षांपासून बँक याच्या प्रतिक्षेत आहे. दोन वर्षांपर्यंत या खात्यावर कोणीही दावा सांगितला नाही तर ही खाती दोन वर्षांनंतर गोठवण्यात येणार असल्याची माहिती, बँकेनी दिली आहे.

स्वित्झर्लँडमधील बँकांची देखरेख करणाऱ्या संस्थेने डिसेंबर २०१५ साली पहिल्यांदा या खात्याची यादी प्रसिद्ध केली होती. स्वित्झर्लंडने प्रसिद्ध केलेल्या आकड्यानुसार, ६ भारतीय निष्क्रीय खाती असून तीन खाती ही भारतीय आहेत. परंतु, ते सध्या भारतात नाही तर अन्य देशात राहतात. या खात्यात एकूण ४.४ कोटी स्विस फ्रँक म्हणजेच ३०० कोटी रुपये इतका पैसा आहे. ही खाती भारताशी संबंधीत आहेत. यादीत समावेश असलेली ही खाती २०२० पर्यंत ठेवणार आहेत, तोपर्यंत या खात्यांवर दावा सांगता येईल. त्यानंतर ही खाती गोठवण्यात येईल व यादीतून बाद करण्यात येईल, असं बँकेने स्पष्ट केले आहे.

या यादीत अन्य सुद्धा खाती असून यात ५०० स्विस फ्रँक आहे आणि ६० वर्षांपासून यावर कोणीही दावा सांगितला नाही, यात स्वित्झर्लंडमधील लोकांची मोठी संख्या आहे. तसेच जर्मनी, फ्रान्स, ब्रिटन, यूएस, तुर्की, ऑस्ट्रेलिया आणि अन्य देशांतील नागरिकांचा समावेश आहे. 
हाफिज सईदला झटका; फेसबुकने डिलिट केलं अकाऊंट

हाफिज सईदला झटका; फेसबुकने डिलिट केलं अकाऊंट



इस्लामाबाद :- मिली मुस्लिम लीग नावाचा राजकीय पक्ष स्थापन करून पाकिस्तानच्या राजकारणात उतरलेला मुंबई हल्ल्याचा मास्टर माइंड, दहशतवादी हाफिज सईदला जोरदार सोशल झटका बसला आहे. फेसबुकने हाफिस सईदच्या पक्षाचं फेसबुक पेज डिलिट केलं आहे. विशेष म्हणजे हाफिजच्या पक्षाच्या उमेदवारांचे आणि त्याच्या पक्षाशी संबंधित अन्य फेसबुक पेजेसही डिलिट करण्यात आल्यानं हाफिजला ऐन निवडणुकीत मोठा झटका बसला आहे.

'एक्सप्रेस ट्रिब्यून'ने याबाबतचं वृत्त दिलं आहे. फेसबुकच्या या कृतीमुळे मिली मुस्लिम लीगचे धाबे दणाणले असून 'फेसबुकने त्यांच्या धोरणांचं उल्लंघन केलं आहे. हे अभिव्यक्ती स्वातंत्र्याचं हनन असून आमच्यावर फेसबुकने अन्याय केलाय,' असा टाहो मिली मुस्लिम लीगने फोडला आहे. येत्या २५ जुलै रोजी पाकिस्तानात मतदान होत आहे. या पार्श्वभूमीवर हाफिजच्या पक्षावर बंदी घालण्यात आली होती. त्यामुळे त्यांनी अल्लाह-ओ-अकबर तहरीक नावाने नवा राजकीय पक्ष स्थापन करून निवडणूक मैदानात उमेदवार उभे केले आहेत.

पाकिस्तानमध्ये २५ जुलै रोजी निवडणुका होत असल्याने फेसबुकनेही त्यापार्श्वभूमीवर अनेक निर्णय घेतले आहेत. पाकिस्तानमधील कोणत्याही दहशतवादी गटाने फेसबुकचा दुरुपयोग करू नये म्हणून हे निर्णय घेण्यात आल्याचं पाकिस्तानमधील कंपनीचे प्रवक्ते सरीम अजीज यांनी सांगितलं.
अयोध्या वादः 'ती' जमीन राम मंदिरासाठी दानः शिया बोर्ड

अयोध्या वादः 'ती' जमीन राम मंदिरासाठी दानः शिया बोर्ड



नवी दिल्ली :- अयोध्यामधील मुस्लिमांना मिळालेल्या वादग्रस्त जमिनीचा खरा दावेदार केंद्रीय शिया वक्फ बोर्डच आहे. कारण बाबरी मशीद मीर बाकी यांनी बनवली होती व ते एक शिया होते. त्यामुळे अलाहाबाद हायकोर्टाने मुस्लिमांना दिलेली एक तृतियांश जमीन राम मंदिर बनवण्यासाठी हिंदुंना दान द्यायची आहे, असे आज केंद्रीय शिया वक्फ बोर्डाने सुप्रीम कोर्टात स्पष्ट केले.

शिया वक्फ बोर्डाच्यावतीने ज्येष्ठ वकील एस. एन. सिंह यांनी सुप्रीम कोर्टात ही माहिती दिली. देशाची एकता, अखंडता, शांती आणि सद्भावना यासाठी शिया वक्फ बोर्ड अयोध्यामधील वादग्रस्त जमीन राममंदिरासाठी दान करण्याच्या बाजुने आहे.

तर दुसरीकडे, बामियान बुद्धाच्या मूर्त्यांना मुस्लिम तालिबानने नष्ट केले होते तर बाबरी मशिदीला हिंदू तालिबानने उद्ध्वस्त केले आहे, असे मुस्लिम आणि सुन्नी वक्फ बोर्डाचे ज्येष्ठ वकील राजीव धवन म्हणाले. याआधीही शिया बोर्डाने ही जमीन दान करण्याचे म्हटले आहे
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 सुप्रीम कोर्टात आज मुस्लिम पक्षकारांची राम मंदिराच्या जमिनीसंबंधी सुनावणी करण्यात आली. सरन्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश अशोक भूषण आणि न्यायाधीश एस. एस नजीर यांच्या विशेष खंडपीठासमोर १७ मे रोजी हिंदू संघटनांची सुनावणी झाली होती.

राममंदिरासाठी झालेल्या आंदोलनात ६ डिसेंबर १९९२ साली अयोध्यामधील बाबरी मशीद पाडण्यात आली होती. अलाहाबाद हायकोर्टाने ३० सप्टेंबर २०१० साली अयोध्या टायटल वादाप्रकरणी निर्णय दिला होता. त्यावेळी कोर्टाने स्पष्टपणे सांगितले होते की, वादग्रस्त जमिनीचे तीन भाग झाले पाहिजेत.

 ज्या जागेवर रामची मूर्ती आहे ती जागा रामला द्यायला हवी. सीता रसोई आणि राम चबुतरा निर्मोही आखाड्याला समान जागावाटप झाल्यानंतर उर्वरित एक तृतियांश जागा सुन्नी वक्फ बोर्डाला द्यायला हवी, असे कोर्टाने आदेश दिले होते. 
जिनांचे तैलचित्र लावण्यात गैर काय?: हमीद अन्सारी

जिनांचे तैलचित्र लावण्यात गैर काय?: हमीद अन्सारी


नवी दिल्ली :- अलीगढ मुस्लिम विद्यापीठातील मोहम्मद अली जिना यांच्या तैलचित्रावरून सुरू असलेल्या वादात माजी उपराष्ट्रपती हमीद अन्सारी यांनी उडी घेतली आहे. कोलकातामध्ये व्हिक्टोरिया स्मारक असू शकतं, तर अलीगढ मुस्लिम विद्यापीठात जिनांचं तैलचित्र असेल तर त्यात गैर काय, असा सवाल त्यांनी केला.

हमीद अन्सारी यांनी टाइम्स ऑफ इंडियाला एक्स्क्लुझिव्ह मुलाखत दिली. त्यात त्यांनी जिनांच्या तैलचित्रावरून सुरू असलेल्या वादाबाबत मत व्यक्त केलं. 'विद्यार्थी संघटनांकडून उत्तुंग व्यक्तिमत्व असलेल्या व्यक्तींचा सन्मान करण्याची परंपरा खूप जुनी आहे. सर्वात प्रथम महात्मा गांधींचा गौरव करण्यात आला होता. पोर्ट्रेट गॅलरीत त्यांचं तैलचित्र लावण्यात आलं होतं. देशाचे पंतप्रधान, मोरारजी देसाई, मदर तेरेसा, खान अब्दुल गफार खान यांच्या सन्मानार्थ तिथं तैलचित्र लावण्यात आले आहेत. जिनांचाही गौरव करण्यात आला होता. त्यामुळं त्यांचंही तैलचित्र त्या ठिकाणी लावण्यात आलं आहे. जिना १९३८ मध्ये त्या ठिकाणी गेले होते. मग त्यांचे तैलचित्र तेथे लावलं तर त्यात गैर काय? व्हिक्टोरिया स्मारक असू शकतं तर जिनांचा तैलचित्र का असू शकत नाही? भवन आणि तैलचित्रांची तोडफोड करण्याची आपली परंपरा नाही, असं त्यांनी सांगितलं.

मुस्लिमांमध्ये असुरक्षिततेची भावना असल्याच्या प्रश्नावर ते म्हणाले, की 'मुस्लिम चिंतित आहेत. अल्पसंख्याकांमध्ये असुरक्षिततेची भावना असून या मुद्द्यावर बोलण्याची गरज आहे.' पंतप्रधानांनी या मुद्द्यावर बोलायला हवं का, असं विचारलं असता, 'पंतप्रधानांनी काय करायला हवं, काय नको हे सांगणारा मी कोण? इतरांप्रमाणे एक नागरिक म्हणून माझेही काही अधिकार आणि जबाबदाऱ्या आहेत. देशातील मुस्लिम हे अजूनही देशाचेच नागरिक आहेत.' 'आयडिया ऑफ इंडिया' धोक्यात असल्याच्या अमर्त्य सेन यांच्या मताशी सहमत असल्याचंही ते म्हणाले.
केंद्राचे हात वर

केंद्राचे हात वर


नवी दिल्ली :-प्रौंढामधील खासगी समलैंगिकता हा गुन्हा ठरवणाऱ्या भारतीय दंड संहितेतील कलम ३७७च्या घटनात्मक वैधतेचा निर्णय आम्ही न्यायालयाच्या सद्सद्विवेकबुद्धीवरच सोडतो, असे प्रतिज्ञापत्र केंद्र सरकारने बुधवारी सर्वोच्च न्यायालयात दाखल केले.

 'या विषयाचे परिणाम अत्यंत दूरगामी असल्यामुळे कलमाच्या वैधतेखेरीज अन्य कोणत्याही विषयावर न्यायालयाने निकाल देऊ नये,' अशी विनंतीही केंद्राने सर्वोच्च न्यायालयाला केली.सरन्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्या. रोहिंग्टन नरिमन, न्या. अजय खानविलकर, न्या. धनंजय चंद्रचूड आणि न्या. इंदू मल्होत्रा यांच्या खंडपीठासमोर याबाबतच्या याचिकांची सुनावणी सुरू आहे.

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता यांच्यामार्फत केंद्राने म्हणणे मांडले. नर्तक नवतेजसिंग जोहर, माजी अॅटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी, ज्येष्ठ विधिज्ञ अरविंद दातार आणि सौरभ कृपाल यांनी कलम ३७७विरोधात याचिका दाखल केल्या आहेत. या कलमामुळे घटनेने दिलेल्या खासगीपणाच्या मूलभूत हक्काचे उल्लंघन होत असल्यामुळे ते रद्दबातल ठरवावे, अशी याचिकाकर्त्यांची मागणी आहे.

सर्व याचिका यंदा दाखल केल्या गेल्या आहेत, याकडे लक्ष वेधून प्रतिज्ञापत्रात म्हटले आहे की, कलमातील विशिष्ट तरतुदींच्या वैधता तपासण्याखेरीज अन्य मुद्द्यांवर विचार करायचा असल्यास केंद्राच्या व्यापक प्रतिज्ञापत्राची गरज भासेल. तसेच सरकारमधील सर्व घटकांशी विचारविनिमय केल्याखेरीज अशा प्रकारचे प्रतिज्ञापत्र सादर करता येणार नाही. केंद्राचे मत विचारात न घेता व्यापक मुद्द्यावर निकाल दिला गेल्यास ते न्यायाच्या मूलभूत तत्त्वांच्या विरोधात ठरेल.


  • कलम ३७७ काय म्हणते?


- हे कलम ब्रिटिश आमदनीत १८६१मध्ये तयार करण्यात आले होते.

- निसर्गनियमाविरुद्ध केलेले कोणतेही मैथुन गुन्हा आहे, असे या कलमात नमूद आहे.

- त्यामुळे समलिंगी संबंध तसेच गुदमैथुनदेखील गुन्हा ठरतो.

- या गुन्ह्यासाठी जन्मठेपेबरोबरच गुन्ह्याच्या स्वरूपानुसार १० वर्षांपर्यंत शिक्षा आणि दंडाची तरतूद आहे.


  • न्यायालयातील घटनाक्रम


- समलैंगिक संबंध गुन्हा नसल्याचा निकाल दिल्ली उच्च न्यायालयाने २००९मध्ये दिला होता.

- सन २०१३ मध्ये सुरेशकुमार कौशल विरुद्ध नाझ फाऊंडेशन या खटल्यात सर्वोच्च न्यायालयाच्या खंडपीठाने ११ डिसेंबर २०१३ रोजी हा निकाल फिरवला.

- कायद्यात बदल करणे हा संसदेचा अधिकार आहे, न्यायसंस्थेचा नाही, असे त्या वेळी सर्वोच्च न्यायालयाने म्हटले होते.

- याप्रकरणी एकूण आठ फेरविचार याचिका दाखल करण्यात आल्या होत्या. त्यांची सुनावणी नव्याने घ्यावी, असे न्यायालयाने म्हटले होते.

- आयआयटीच्या एलजीबीटी माजी विद्यार्थी संघटनेने भारतीय दंड संहितेतील ३७७व्या कलमाच्या घटनात्मक वैधतेला आव्हान देणारी याचिका सर्वोच्च न्यायालयात दाखल केली.

- २७ एप्रिलला हमसफर ट्रस्टचे अशोक राव कवी आणि अरीफ जफर यांनीही ३७७व्या कलमाविरोधात याचिका दाखल केली.
'पंतप्रधानपदाच्या शर्यतीत नाही; योग्यतेपेक्षा अधिक मिळालंय'

'पंतप्रधानपदाच्या शर्यतीत नाही; योग्यतेपेक्षा अधिक मिळालंय'


नवी दिल्ली :- 'राजकीय आयुष्यात मला माझ्या योग्यतेपेक्षा खूप अधिक मिळालंय. त्यामुळं मी कोणत्याही शर्यतीत नाही. पंतप्रधानपदाच्याही नाही,' असं केंद्रीय रस्ते व परिवहनमंत्री नितीन गडकरी यांनी स्पष्ट केलं आहे.मोदी सरकारला चार वर्षं पूर्ण झाल्याच्या पार्श्वभूमीवर एका न्यूज वेबसाइटला दिलेल्या मुलाखतीत गडकरी बोलत होते. आगामी लोकसभा निवडणुकीत भाजपला बहुमत न मिळाल्यास सर्वसहमतीचा उमेदवार म्हणून आपल्याकडं पाहिलं जात असल्याबद्दल त्यांना विचारण्यात आलं होतं. त्यावर बोलताना गडकरी यांनी कुठल्याही शर्यतीत नसल्याचं स्पष्ट केलं. 'मी माझ्या पक्षाच्या विचारधारेशी एकनिष्ठ आहे. मंत्री म्हणून मी खूप समाधानी आहे. मला पंतप्रधानपदाच्या शर्यतीत उतरण्याची इच्छा नाही,' असं त्यांनी सांगितलं. 'पुढील निवडणुकीत भाजपलाच पूर्ण बहुमत मिळेल आणि नरेंद्र मोदी हेच पंतप्रधान होतील,' असा विश्वासही त्यांनी व्यक्त केला.


  • मोदींना अनेकदा विरोध करतो!

नरेंद्र मोदी यांचं मंत्र्यांवर दडपण असतं का, या प्रश्नाला गडकरी यांनी नकारार्थी उत्तर दिलं. 'केंद्रीय मंत्रिमंडळाच्या बैठकीत मी अनेकदा मोदींच्या मतांशी असहमती दर्शवलीय. त्यासाठी मला कुठल्याही नाराजीचा सामना करावा लागलेला नाही. मंत्रिमंडळाच्या बैठकीत प्रत्येक मंत्र्याला बोलण्याची संधी मिळते. अनेक जण वेगवेगळी मतं मांडतात. मोदी सर्वांचंच ऐकतात,' असं गडकरी म्हणाले.


  • अच्छे दिन आलेत का ?

'अच्छे दिन'बद्दलचा प्रत्येकाचा दृष्टिकोन वेगळा आहे. ही संकल्पना व्यक्तिनिहाय बदलते. लोकांच्या अपेक्षा सतत वाढत असतात. मात्र, भूतकाळातील कारभार आणि सध्या सरकारची कामगिरी याची तुलना केल्यास फरक सहज लक्षात येतो,' असं गडकरी म्हणाले.
मी कोण? राष्ट्रवादी, धर्मनिरपेक्ष की नास्तिक; रिक्षावाला कोर्टात

मी कोण? राष्ट्रवादी, धर्मनिरपेक्ष की नास्तिक; रिक्षावाला कोर्टात


अहमदाबाद :- जातीव्यवस्थेचा सामना करावा लागणाऱ्या एका रिक्शाचालकाने गुजरात उच्च न्यायालयालाकडे एक अजब मागणी केली आहे. 'मला रोजच जातीव्यवस्थेचा सामना करावा लागतोय. त्यामुळे माझ्या धर्माला धर्मनिरपेक्ष, नास्तिक किंवा राष्ट्रवादी घोषित करा,' अशी मागणी या रिक्शाचालकाने कोर्टाकडे याचिकेद्वारे केली आहे.

राजीव उपाध्याय असं या रिक्शाचालकाचं नाव आहे. त्याने केवळ त्याच्या धर्माची परिभाषा करायला कोर्टाला सांगितले नाही तर गुजरात फ्रिडम ऑफ रिलिजन अॅक्टमध्ये बदल करण्याची मागणीही केली आहे. या कायद्यात नास्तिकता आणि धर्मनिरपेक्षतेचा उल्लेख करण्यात आलेला नाही, असं त्यानं म्हटलं आहे.

धर्माला नास्तिकतेत बदलण्याचा अर्ज जिल्हाधिकाऱ्याने फेटाळून लावल्यानेच कोर्टात धाव घ्यावी लागल्याचंही त्यानं म्हटलं आहे. भारतीय संविधानाच्या अनुच्छेद २५ आणि २६ नुसार देशातील प्रत्येक नागरिकाला धर्म स्वीकारण्याचं आणि त्याचा प्रचार-प्रसार करण्याचं स्वातंत्र्य दिलं आहे. त्यामुळे माझा अर्ज फेटाळण्याचा जिल्हाधिकाऱ्याचा निर्णय चुकीचा आणि बेकायदेशीर आहे, असं त्यानं या याचिकेत नमूद केलं आहे. गुजरात फ्रिडम ऑफ रिलिजन अॅक्टमुळे धार्मिक स्वातंत्र्यावर बंधन घालण्यात आली आहेत.

त्यामुळे तुम्ही धर्मांतर करू शकत नाहीत आणि नास्तिकही होऊ शकत नाही. खरे तर हा कायदा संविधानाच्या विपरीत असल्याने यामुळे संविधानातील धार्मिक स्वातंत्र्यावर गदा आली असून हा कायदा बदलण्यात यावा, अशी मागणीही त्याने याचिकेत केली आहे .

उपाध्याय हे अनुसूचित जातीतील 'गुरू-ब्राह्मण' जातीचे आहेत. मला नास्तिक आणि धर्मनिरपेक्ष मानलं जात नसेल तर मला राष्ट्रवादी जाहीर करावं. धर्माच्या कॉलममध्ये मला 'राष्ट्रवादी' हा शब्द लिहिण्याची परवानगी देण्यात यावी अशी मागणीही उपाध्याय यांनी केली आहे.
चंद्रपूर,गडचिरोली व यवतमाळ जिल्हयातील रस्ते विकास कामांचा मार्ग मोकळा - केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर

चंद्रपूर,गडचिरोली व यवतमाळ जिल्हयातील रस्ते विकास कामांचा मार्ग मोकळा - केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर


नवी दिल्ली दि. १९ : राज्यातील चंद्रपूर,गडचिरोली व यवतमाळ या नक्षलग्रस्त व शेतकरी आत्महत्याग्रस्त जिल्हयांतील महामार्गांसह ६ हजार कोटींच्या रस्ते विकास कामांना उच्चस्तरीय बैठकीत विविध मंजुरी देण्यात आली असून या कामांना  गती येणार असल्याची माहिती केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर यांनी दिली.

 केंद्रीय भूपृष्ठ वाहतूक व महामार्ग मंत्री नितीन गडकरी यांच्या अध्यक्षतेखाली आज  परिवहन भवन येथे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री तथा चंद्रपूरचे खासदार हंसराज अहीर, महाराष्ट्राचे सार्वजनिक बांधकाम राज्यमंत्री तथा यवतमाळचे पालकमंत्री मदन येरावार, गडचिरोलीचे खासदार अशोक नेते तसेच केंद्र व राज्य शासनाचे वरिष्ठ  अधिकारी यांच्या उपस्थितीत चंद्रपूर,गडचिरोली आणि यवतमाळ जिल्हयातील रस्ते विकास कामांची आढावा बैठक झाली.

                या बैठकीत तिनही जिल्हयांतील ‘भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरणांतर्गत’ बांधण्यात येणारे ८ महामार्ग, ‘अभियांत्रिकी, खरेदी व बांधकाम(ईपिसी) कार्यक्रमांतर्गत’ बांधण्यात येणारे ९ रस्ते आणि  ‘केंद्रीय रस्ते निधीतून’ करण्यात येणा-या २२ कामांचा आढावा घेण्यात आला. यावेळी रस्ते विकास कामांसंदर्भातील विविध मंजुरी देण्यात आल्या. तसेच, या कामांसाठी आवश्यक असणारी वन विभागाची मंजुरी  व रस्ते बांधकामांचे सविस्तर प्रकल्प अहवाल तयार करण्याचे निर्देशही देण्यात आल्याचे श्री. अहीर यांनी यावेळी सांगितले.


  •           प्राणहिता नदीवरील पुलाच्या कामाचे पुढील महिन्यात उद्घाटन येत्या तीन महिन्यात विविध कामांचे भूमिपूजन 

  नक्षलग्रस्त गडचिरोली जिल्हयाच्या दृष्टीने महत्वाचा असणारा व या भागात विविध विकास कामांना पूरक ठरणा-या  प्राणहिता नदीवरील पुलाचे बांधकाम पूर्ण होत आले आहे, यासंदर्भात आजच्या बैठकीत चर्चा झाली. पुढील महिन्यात या पुलाचे उद्घाटन करण्याबाबतही एकमत झाल्याचे श्री. अहीर म्हणाले. या पुलामुळे छत्तीसगड, तेलंगाना व महाराष्ट्र या तिनही राज्यांतील नक्षलग्रस्त भाग जोडला जाणार आहे. तसेच, गडचिरोली भागातील नक्षली हालचालींवर निरिक्षण ठेवण्यासाठी व या राज्यांतील दळण-वळणासाठीही मोठी मदत होणार असल्याचे श्री. अहीर म्हणाले. यासह तिनही जिल्हयांतील रस्त्यांचे विकास  कामे अंतिम टप्प्यात असून येत्या तीन महिन्यात विविध कामांचे उद्घाटनही  होणार असल्याची माहिती त्यांनी दिली.
         

  •   वर्धा नदीवर ‘बंधारा व पुलाचा’ प्रायोगिक प्रकल्प  


   केंद्रीय भूपृष्ठ वाहतूक व महामार्ग मंत्रालयाच्यावतीने  ‘वणी ते वरोरा’ महामार्गा दरम्यान वर्धा नदीवर ‘बंधारा व पुल’ बांधण्याचा प्रायोगिक प्रकल्प हाती घेण्यात आला आहे. या संदर्भातही आज चर्चा झाली. या पुलाच्या माध्यमातून वाहतूक व जलसंधारणाचे उत्तम कार्य होऊ शकते व हा प्रयोग यशस्वी झाल्यास इतर भागांमध्ये  याचे अनुकरण करण्यात येईल असेही  एकमताने  ठरले.


  •   या  ८ महामार्गांचा घेण्यात आला आढावा 


   आजच्या बैठकीत महागाव ते यवतमाळ हा ३६१ क्रमांकाचा व ७८ कि.मी.लांबीचा महामार्ग, वणी ते वरोरा हा ९३० क्रमांकाचा १८ कि.मी. , यवतमाळ ते वर्धा हा ३६ क्रमांकाचा ७० कि.मी.,  नागपूर ते हैद्राबाद हा ७ क्रमांकाचा २२ कि.मी. , ब्राह्मणी-राजुरा-वरुड- देवरापूर हा ३० कि.मी , राजुरा-कोरपन्हा-आदिलाबाद हा ५७ कि.मी.  आणि  वर्धा- बुटीबोरी  या ५९ कि.मी. लांबीच्या मार्गाचा आढावा घेण्यात आला.
                     

  •   ईपीसी अंतर्गत ९ रस्ते विकास कामांचा आढावा 


 अभियांत्रिकी, खरेदी व बांधकाम (ईपिसी) कार्यक्रमांतर्गत चंद्रपूर, गडचिरोली व यवतमाळ जिल्हयात  बांधण्यात येणा-या ९ रस्ते विकास कामांचा आजच्या बैठकीत आढावा घेण्यात आला. यात नागभीड- आरमोरी (३९ कि.मी.), प्राणहिता पुल (१६८ कोटी खर्च), गडचिरोली –मुल ( ४१ कि.मी.), चिमूर-वरोरा (४२कि.मी.), मालेवाडा-चिमूर(३१ कि.मी.),मूल-चंद्रपूर(३९ कि.मी.), बामनी –नवेगाव(४२ कि.मी.) दिग्रस-दारव्हा-कारंजा (७४ कि.मी.) आणि आर्णी ते नायगावबंदी  ( ४५ कि.मी.) या रस्ते विकास कामांचा समावेश आहे.


  •   केंद्रीय रस्ते निधीतून करण्यात येणा-या २२ कामांचा आढावा


 चंद्रपूर शहारात ३५० कोटींच्या खर्चातून  बांधण्यात येणा-या  उड्डाण पुलासह अन्य १० कामांचा आढावा या बैठकीत घेण्यात आला. तसेच यवतमाळ व चंद्रूपूर जिल्हयातील घाटंजी-पारवा(३५ कोटी),बोटी-पाळा-मुकुटवर (४९ कोटी )  पारवा-पिंपडखुटी(८० कोटी ) आदीं कामांचा आढावा घेण्यात आला.  
​महाराष्ट्रात नव्याने 196 शाळांत ‘अटल टिंकरिंग लॅब’​  ​राज्यात  टिंकरिंग लॅबची संख्या 387

​महाराष्ट्रात नव्याने 196 शाळांत ‘अटल टिंकरिंग लॅब’​ ​राज्यात टिंकरिंग लॅबची संख्या 387


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​नवी दिल्ली, दि. 12​ : नीती आयोगाच्या अटल इनोव्हेशन मिशन अंतर्गत ‘अटल टिंकरिंग लॅब’ उभारण्यासाठी देशातील आणखी 3 हजार शाळांची निवड करण्यात आली आहे. यामध्ये महाराष्ट्रातील 196 शाळांचा समावेश आहे. पहिल्या दोन टप्प्यात राज्यातील 191 शाळांची निवड झाली असून राज्यात उभारण्यात येणा-या लॅबची संख्या 387 पर्यंत पोहचली आहे.
देशभरातील माध्यमिक शाळांतील विद्यार्थ्यांमध्ये कल्पकता व उद्योजकतेची जोपसना व्हावी,  विद्यार्थ्यांच्या नव्या संकल्पनांना आकार देऊन त्यांच्यातील कौशल्य विकसित करणे या उद्देशाने ‘अटल टिंकरिंग लॅब’ उभारण्यात येत आहेत. निती आयोगाच्या ‘अटल इनोव्हेश मिशन’चे व्यवस्थापकीय संचालक रामनाथम रामानन यांनी आज ‘अटल टिंकरिंग लॅब’ उभारण्यासाठी  देशातील आणखी 3 हजार शाळांची निवड झाल्याची घोषणा केली, यामध्ये महाराष्ट्रातील 196 शाळांचा समावेश आहे. आतापर्यंत या योजनेंतर्ग देशातील 5 हजार 441 शाळांची निवड करण्यात आली आहे व महाराष्ट्रातील एकूण 387 शाळांचा यात समावेश आहे.

​राज्यातील 387 शाळांसाठी 77 कोटी 40 लाखांचे अनुदान​
 
‘अटल टिंकरिंग लॅब’साठी निवड झालेल्या प्रत्येक शाळेला टिंकरिंग लॅब तयार करण्यासाठी पाच वर्षांच्या कालावधीत 20 लाख रुपयांचे अनुदान देण्यात येणार आहे. यानुसार पुढील पाच वर्षात महाराष्ट्रातील एकूण 387 शाळांना 77 कोटी 40 लाख रूपयांचे अनुदान प्राप्त होणार आहे. 
​पश्चिम महाराष्ट्रातील सर्वात जास्त 66 शाळांची निवड​
पुणे जिल्हयातील 28 शाळांचा समावेश महाराष्ट्रातील निवड झालेल्या शाळांमध्ये सर्वात जास्त 66 शाळा या पश्चिम महाराष्ट्रातील असून पुणे जिल्हयातील 28 शाळांचा यात समावेश आहे. या विभागात कोल्हापूर (17),सोलापूर (10), सांगली (6) आणि सातारा जिल्हयातील 5 शाळांची निवड झाली आहे. 
​विदर्भातील 43 शाळांचा समावेश​
‘अटल टिंकरिंग लॅब’ साठी विदर्भातील 43 शाळांची निवड झाली आहे. या विभागात निवड झालेल्या शाळांची जिल्हा निहाय यादी पुढील प्रमाणे. नागपूर (11), अमरावती (6), गोंदिया (5), वाशिम (4), चंद्रपूर (4), गडचिरोली (3), वर्धा (3), यवतमाळ (3), अकोला (2), भंडारा (1) व बुलढाणा (1).
​खान्देशातील 31 शाळांमध्ये लॅब उभारण्यात येणार​
खान्देश विभागातील 5 जिल्हयांमधील 31 शाळांमध्ये ‘अटल टिंकरिंग लॅब’ योजनेच्या तिस-या टप्प्यात लॅब उभारण्यात येणार आहेत. अहमदनगर जिल्हयातील सर्वात जास्त 16 शाळांची निवड झाली आहे. यासोबतच धुळे (6), नाशिक (6), नंदुरबार (2) आणि जळगाव जिल्हयातील एका शाळेचा  निवड यादीत  समावेश आहे आहे. 
   
​कोकण विभागातील 29 तर मराठवाडयातील 27 शाळांची निवड​
कोकण  विभागातील 6 जिल्हयांमधून एकूण 29 शाळांची निवड  झाली आहे. या विभागात सर्वात जास्त ठाणे जिल्हयातील 14 शाळांची निवड झाली आहे. याशिवाय मुंबई उपनगर (5), रायगड (4), मुंबईशहर (3), रत्नागिरी (2) आणि सिंधुदुर्ग जिल्हयातील  एका शाळेची निवड झाली आहे.  
‘अटल टिंकरिंग लॅब’ साठी मराठवाडा विभागातील 27 शाळांची निवड झाली असून नांदेड, उस्मानाबाद आणि परभणी या जिल्हयांतील प्रत्येकी 5 शाळांचा यात समावेश आहे . बीड, लातूर आणि जालना जिल्हयातील प्रत्येकी 3 तसेच औरंगाबाद जिल्हयातील 2 आणि हिंगोली जिल्हयातील एका शाळेची निवड करण्यात आली आहे.
यापूर्वी 'अटल टिंकरिंग लॅब' या अभिनव योजनेच्या पहिल्या टप्प्यात महाराष्ट्रातील 75 शाळांची निवड झाली तर दुसऱ्या टप्प्यात राज्यातील 116 शाळांची निवड झाली आहे. 
भय्युजी महाराजांची आत्महत्या; स्वत:वर गोळी झाडून संपवलं जीवन.

भय्युजी महाराजांची आत्महत्या; स्वत:वर गोळी झाडून संपवलं जीवन.


अध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज यांनी आत्महत्येचा प्रयत्न केला आहे. भय्यूजी यांनी स्वत:वरगोळी झाडून आत्महत्येचा प्रयत्न केला. इंदूरमध्ये ही धक्कादायक घटना घडली. त्यांनी आत्महत्येचा प्रयत्न का केला, याचं कारण अद्याप स्पष्ट होऊ शकलेलं नाही. त्यांना उपचारांसाठी बॉम्बे रुग्णालयात दाखल करण्यात आलं आहे.
महाराष्ट्राच्या राजकारणात भय्यूजी महाराजांचा बराच बोलबाला आहे. राजकारणात अनेकदा यशस्वी मध्यस्थी करण्यासाठी भय्यूजी महाराज ओळखले जातात. गुजरात मधलं नरेंद्र मोदींचं सद्भवना उपोषण भय्यूजींच्या मध्यस्थीनेच सोडवण्यात आलं. तर अनेकदा किचकट प्रश्न सोडवण्याकरता राजकीय नेते भय्यूजी महाराजांना मध्यस्थीची विनंती करतात. मराठा आरक्षणसाठीच्या मोर्चामागे भय्यूजी महाराज असल्याच्याही चर्चा होत्या.
काँग्रेस नेते जेव्हा संघाच्या व्यासपीठावर दिसतात

काँग्रेस नेते जेव्हा संघाच्या व्यासपीठावर दिसतात



देशाचे माजी राष्ट्रपती प्रणव मुखर्जी तीन दिवसांच्या दौऱ्यासाठी नागपुरात दाखल झाले आहेत. आज संध्याकाळी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघाच्या तृतिय वर्ष समारोपाला प्रमुख पाहुणे म्हणून ते उपस्थित राहणार आहेत.प्रणव मुखर्जी संघाच्या कार्यक्रमाला उपस्थित राहणार म्हणून देशभरात चर्चा सुरू आहे. मात्र संघाच्या कार्यक्रमाला हजेरी लावणारे प्रणव मुखर्जी हे पहिलेच नेते नव्हे.
या आधी काँग्रेस आणि संघ यांचं नातं कसं राहिलंय.
काँग्रेसच्या दिग्गजांनी याआधी संघाच्या कार्यक्रमाला उपस्थिती लावली आहे.


  • कोणकोणत्या नेत्यांनी लावली आहे हजेरी 


 26 जानेवारी 1963 - भारताचे पहिले पंतप्रधान पंडित जवाहरलाल नेहरु यांनी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघाला प्रजासत्ताकदिनाच्या संचलनात सहभागी होण्याचं आमंत्रण दिलं होतं. 1962  मध्ये चीन विरुद्धच्या युद्धात पोलीस बल कमी पडलं, तेव्हा संघाच्या स्वयंसेवकांनी कायदा आणि सुव्यवस्थेची जबाबदारी सांभाळली होती. खरं तर जवाहरलाल नेहरु संघाचे कट्टर विरोधक होते.
पण 1962 मध्ये स्वयंसेवकांच्या कामाची दखल घेत नेहरुंनी 1963 च्या प्रजासत्ताक दिनाच्या संचलनात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघाला विशेष निमंत्रण दिलं होतं. १९६५ साली दुसरे पंतप्रधान लालबहाद्दूर शास्त्री यांनी संघाच्या स्वयंसेवकांकडून दिल्लीमध्ये पोलिसांचं काम करुन घेतलं होतं. संघाचीच उपशाखा असलेल्या विवेकानंद केंद्रानं कन्याकुमारीत विवेकानंद स्मारक उभारलं, त्यावेळी १९७७ साली इंदिरा गांधींनी या स्मारकाला भेट दिली होती. याहीआधी संघाच्या कार्यक्रमात महात्मा गांधीजीही सहभागी झाले होते.
संघाच्या शिस्तीचं गांधीजींनी वेळोवेळी कौतुकही केलं होतं. तसंच  डॉ. झाकिर हुसेन,बाबू जयप्रकाश नारायण, जनरल करिअप्पा यांनीही संघाच्या कार्यक्रमाला उपस्थिती लावली होती.
भारत,बांग्लादेश सहयोग एवं आपसी समझ से जुड़े दो देश हैं :मोदी

भारत,बांग्लादेश सहयोग एवं आपसी समझ से जुड़े दो देश हैं :मोदी

जाहिरात

शांतिनिकेतन :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत और बांग्लादेश सहयोग एवं आपसी समझ से जुड़े दो अलग देश हैं।

मोदी ने यहां विश्वभारती विश्वविद्यालय के 49 वें दीक्षांत समारोह में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना , पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विश्वविद्यालय की कुलपति सबुजकोली सेन के साथ मंच साझा किया।
जाहिरात

प्रधानमंत्री ने कहा , ‘‘ भारत और बांग्लादेश सहयोग और आपसी समझ से जुड़े दो भिन्न देश हैं । चाहे उनकी संस्कृति हो या लोकनीति , दोनों देशों के लोग एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। ’’

मोदी ने कहा कि बांग्लादेश भवन इसका एक उदाहरण है।

केंद्रीय विश्वविद्यायल के आचार्य अथवा चांसलर मोदी ने इस मौके पर शेख हसीना के साथ बांग्लादेश भवन का उद्घाटन किया।

भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक संबंधों के प्रतीक इस भवन का निर्माण विश्वविद्यालय परिसर में बांग्लोदश ने किया है।

युवकों के मस्तिष्क को निखारने में विश्वभारती के योगदान की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि वह टैगोर की भूमि पर पहुंचकर रोमांचित हुए।
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उन्होंने कहा , ‘‘ मंच पर आते समय मैं सोच रहा था कि यह रवींद्रनाथ टैगोर की भूमि है। यहीं कहीं उन्होंने रचनाएं लिखीं , गीत लिखे और महात्मा गांधी के साथ विमर्श किया और अपने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। ’’

केंद्र की मदद से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा , ‘‘ मुझे बताया गया कि आप 50 गांवों का विकास कर रहे हैं। आप 2021 तक , जब विश्वविद्यालय के सौ साल पूरे हो जाएंगे , 50 और गांवों का विद्युत आपूर्ति , गैस कनेक्शन और ऑनलाइन विनिमय के साथ विकास करने का संकल्प ले सकते हैं। ’’

इस मौके पर उन्होंने उनके बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर के गुजरात संपर्क की भी चर्चा की।
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उन्होंने कहा , ‘‘ सिविल सेवा से जुड़ने वाले पहले भारतीय सत्येंद्र नाथ टैगोर अहमदाबाद में तैनात थे। 17 साल की उम्र में विदेश जाने से पहले गुरुदेव ने छह महीने के लिए अपने भाई से ट्यूशन लिया। अहमदाबाद में रहने के दौरान उन्होंने एक उपन्यास लिखा और कई कविताएं लिखीं। ’’

मोदी ने कहा , ‘‘125 करोड़ लोगों ने 2022 तक नये भारत का निर्माण करने का संकल्प ले लिया है। यह सपना शिक्षा के माध्यम से हासिल किया जा सकता है और उसके लिए विश्वभारती जैसे संस्थान को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। इस विश्वविद्यालय के स्नातक भारत के विकास में योगदान देंगे , उसे एक नयी दिशा देंगे। ’’