ग़रीबी में भी ज़ाहिर अपनी बेज़ारी नहीं करते

जाहिरात

ग़रीबी में भी  ज़ाहिर  अपनी बेज़ारी नहीं करते
मेरे बच्चे  कभी  तौहीन -ए-ख़ुद्दारी नहीं करते

.हम अपने घर की सूखी रोटियों पर रखते हैं रोज़ा
किसी ज़रदार से उम्मीद -ए-इफ़्तारी नहीं करते

जो ग़म की  धूप में चल कर खुशी की छाँव *Mai* आये
किसी के साथ वो हर्गिज़ रियाकारी नहीं करते

हमेशा ही यहां ऐसे मुसाफ़िर  ग़म उठाते हैं
सफर की अपनी पहले से जो तैयारी  नहीं करते

"वसीम" अपने क़बीले  में अभी कुछ  लोग ऐसे हैं
वतन पर जान दे देते हैं ग़द्दारी नहीं करते

---वसीम  मलिक  ,  सूरत
---9925191122
जाहिरात

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