
रफीक कनोजे झरी : यवतमाल के जीलाधीकारी द्वारा झरी तहसील मे पर्यावरण का संतुलन और पानी की समस्या निर्माण ना हो ईसलीये हिरापूर (मांगली) का एक ही रेती घाट क्र. 250 की निलामी की गई। ईसके बावजुद जीलाधीकारी के आदेश की धज्जीया उडाते हुये झरी तहसील के परसोडा, येडशी, कोसारा, खातेरा, मुंजाळा, दुर्भा, हिरापुर आदी रेतीघाट से उत्खनन कर रेत्ती की तस्करी हो रही है। ईस पर राजस्व विभाग द्वारा रोक लगाना जरुरी है संपूर्ण यवतमाल जीला पानी की समस्या से जंग लड रहा है। ईसी शृंखला के तहत झरी तहसील मे पानी की समस्या निर्माण ना हो। इसलीये सरकार द्वारा राजस्व का नुकसान कर रेती घाटो की निलामी नही की गई। इसके बावजूद निलामी घाट के अलावा हिरापूर के अन्य रेती घाट से पोकलॅंडद्वारा उत्खनन किया जारहा है। इसके अलावा अन्य घाटो से भी अवैध तरीके से रेती का उत्खनन किया जा रहा है। ईस उत्खनन की जानकारी राजस्व विभाग के सभी कर्मियों को है। इसके बावजूद राजस्व विभाग के कर्मियों की खामोशियां कई संदेह को जन्म देती है। अवैध तरीके से रेती के उत्खनन के चलते जलस्तर कम होरहा है। अगर राजस्व विभाग द्वारा रेती तस्करों पर कार्यवाही नहीं की गई तो आने वाले कुछ दिनों में झरी तहसील में पानी के लीये हाहाकार मच सकता है कई गांव के हैंडपंप इन दिनों खराब पड़े हुए हैं। इस कारण ग्रामीणों को कुओंका सहारा लेना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि गंदगी से लपटे होने के कारण कुओं का पानी भी दूषित हो गया है। ग्रामीणों ने हैंडपंप के मरम्मत करने, कुओं की सफाई करने और आवश्यकता नुसार नये बोअरवेल मारने के लीये प्रशासन से गुहार लगाई है।