रफीक कनोजे झरी :- झरीमे संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ और शिवरामजी मोघे महाविद्यालय पांढरकवडा इनके संयुक्त विद्यमान से आदिवासी जन जागरण कार्यशाला पंचायत समिती सभागृहमे (ता. २९ व ३०) को संपन्न हुई कार्यशाला का उद्घाटन कुलगुरु डॉ. मुरलीधर चांदेकर , अध्यक्ष प्राचार्य डॉ शंकर वऱ्हाटे, प्रमुख अत्तीथी राजेश मिरगे, प्रा नरेश महाजन , प्राचार्य डॉ अजय गुल्हाने , मिराताई फडणवीस , खरबडाके सरपंच पुनाजी कुळमेथे, प्राचार्य डॉ तेलगोटे, प्राचार्य डॉ जलतारे , प्राचार्य विठ्ठल पाईलवार, प्राचार्य डॉ घरोटे अनेक महाविध्यालयके प्राचार्य व मोघे महाविद्यालयाके सभी प्राध्यापक कर्मी गुटविकास अधिकारी शुभाष चव्हाण , सहायक गुटविकास अधिकारी शिवाजी गवई थे।शिवाजी गवईने अपने भाषणमे उद्देश्य कार्यशाला का उद्देश, यहां के आदिवासी किशोर लड़कियों की समस्या और कुमारी माताओं की समस्या, तहसील की वास्तविकता, पेसा कानून की अज्ञानता, आदिवासियों के अधिकार, सरकार की ओर से विविध योजना के लिए झरी को क्यों चुना गया इस पर रोशनी डाली कुंमारी माता की जिम्मेदारी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंप दी जानी चाहिए। ताकी ये कार्यक्रम कागजोमेही समेटकर ना रहे। ईस कार्यशाला का वास्तवीकता में अमल होना चाहिए कुमारी माताओकी जिम्मेदारी अनीता जांभुलकर की तरफ दी जाए। कुमारी माताओ की मांग।
2 दिन चले इस कार्यशाला में कुमारी माताओं पर चर्चा कर मान्यवरोने अपने-अपने मत व्यक्त किए गये। उनकी समस्याएं कार्यशाला में भाषण देने से छुटती नहीं ये वास्तविकता है। झरी तहसील में सौ से अधिक कुमारी माता है। जिस तरह किसान आत्महत्या का गंभीर मामला है उससे अधिक गंभीर मामला कुमारी माताओं का है। लेकिन सरकार द्वारा अनदेखी की जा रही है। दो साल पूर्व आदिवासी प्रकल्प विकास पांढरकवडा द्वारा माथार्जुन ग्रामपंचायत कार्यालय मे रमाई बहुउद्देशीय महिला कल्याण संस्था पांढरकवडा की अध्यक्षा अनीता जांभूलकर ने 130 महिलाओं को कुमारी माता और विधवाओं को सिलाई मशीन का प्रशिक्षण दिया उसके बाद 130 सिलाई मशीन का वितरण किया गया। जिनमें से सौ से अधिक कुमारी माताएं थी।
वे एक महिला होनेके कारण उन्होने कुमारी माताओंके घर घर जाकर उनकी मुश्कीलो को करीब से देखा है। उनके तरफ झरी तहसीलकी कुमारी माताओके नामो की सुची (यादी) भी है। जांभुलकर द्वारा कुमारी माताओं के जीवनयापन और पुनर्वास के लिए अनेक निवेदन और प्रस्ताव दिए गए। लेकिन उनके निवेदन और प्रस्ताव सरकार की दरबार में धूल खाते हुए पड़ी है। कुमारी माताओं की समस्याओ पर उपाय योजना, प्रशिक्षण और पुनर्वास के उपाययोजना कि जानकारी की जिम्मेदारी अनीता जांभुलकर की तरफ दी जाए। ऐसा कुमारी माताओं का कहना है। प्रशासन को कुमारी माताओं के प्रश्न पर ध्यान देने की जरूरत है.

