- 70 साल बाद ग्राम वासियो के अच्छे दिन
- नागरिकों ने भरी राहत की सास
- नव निर्वाचित युवा सरपंच प्रदीप ठाकरे की खास पहल
- रस्ते,पथदिवे,नालियां,पेयजल तथा दलित बस्ती का विकास कार्य जोरो पर
- केवल 3 माह में किया 43 लाख 64 हजार रु विकास कार्य
शफ़ी खान
कुरुम :- अकोला जिले के सबसे आखरी छोर पर बसा हुवा तथा मूर्तिज़ापुर तालुका अंतर्गत कुरुम परिसर से केवल 2 की.मी. अंतर पर आनेवाला ग्राम मधापुरी में आज़ादी के 70 साल बाद "अच्छे दिन आते" दिखाई दे रहे है बता दे कि,करीब 5 हजार आबादी वाले ग्राम मधापुरी में कई समस्याओं का अंबार लगा हुवा था। भारत देश के आजादी को 70 साल पूरे होने के बाद भी यहाँ की गरीब जनता आज तक कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित थी। पानी,लाईट, बिजली,रस्ते के अभाव में यहा के लोगों को, ,महिलाओं को तथा स्कूल छात्रों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी। यहाँ तक की ब्रिटिश कालीन पथरीले कच्चे रास्ते के अभाव कारण यहाँ अमरावती मूर्तिज़ापुर डिपो की बस फेरिया भी बंद हो गई थी।जिसके चलते यहां से शिक्षा के लीये छोटे बड़े करीब दो सौ छात्र,छात्राये कुरुम, मूर्तिज़ापुर,बडनेरा,तथा अमरावती पाठशाला एवं महाविद्यालय में जाते है। और आज भी इनको मधापुरी से कुरुम 2 की.मी. पैदल चलकर आगे का सफर तय करना पड़ता हैं। जिसमे बारिश के दिनों यह कच्चा रास्ता और भी परेशानी का सबब बन जाता है .
मूर्तिजापुर तहसील में सबसे पिछड़ा तथा गंदगी का दूसरा नाम ग्राम मधापुरी को जाना जाता था। शादी ब्याह प्रसंग में आनेवाले लोग भी मधापुरी की ऎसी हालत देखकर भला बुरा कहते थे। चारो औऱ गंधगी ही गंधगी, पक्की नालियां नहीं होने के कारण रास्तो पर बहता गंधा पानी। घर घर सामने मवेशियो के गोबर खत के ढिगार। अमावस पूनम को ही चमकते थे पथदिवे। पानी के लिए भी भटकना पड़ता था मारे मारे। आजादी के 70 साल बाद कई सरपंच चुनकर आये और गए परंतु इनमे से केवल एक ही सरपंच ने सन 1982 में मधापुरी के विकास के बारे में सोचा था वह थे महान हस्ती स्व. बाळा साहब ठाकरे परंतु उनको भी कुछ विरोधियो ने अविश्वास लाकर सरपंच पद से हटा दिया था। उसके बाद मधापुरी गांव पर मानो जैसे काला साया ही छा गया था। जो भी सरपंच बना उसने पूरी ग्रा.पं.को खोकला ही बनाते गया .
आख़िर परेशान हो कर यहा के लोगो ने अब की बार पुराणी पार्टी छोड़कर एक नई यंग पार्टी बनाकर प्रदीप ठाकरे के पेनल को भारी बहुमतों से चुनकर लाया । और प्रदीप हरिदास ठाकरे को सरपंच बना दिया। और सरपंच प्रदीप ठाकरे ने भी जनता के अमूल्य मतों की लाज रखते हुवे केवल तीन महीनों में ही ग्राम मधापुरी को विकास कामों से जगमगा दिया। गांव का कूड़ा कचरा तथा गोबर खत के ढेर सभी उठा दिया। दो मजदूर लगाकर रोजाना नालियो की सफाई की जाती है। मवेशियो का गोठांन गांव से बाहर बना दिया। जो रती महारती सरपंच 70 साल में विकास नही कर पाए वह विकास नव निर्वाचित युवा सरपंच प्रदीप ठाकरे ने केवल तीन महीने मे ही कर के एक इतिहास रच दिया।अक्टूम्बर 2017 को मधापुरी में ग्रा.पं.इलेक्शन हुए थे। एवं जनवरी 2018 को सरपंच प्रदीप ठाकरे को चार्ज दिया गया था.
और लाखो की शासकीय राशि मंजूर करके ग्राम मधापुरी में विविध विकास कार्यो का शुभारंभ कर दिया। जिसमें दलित बस्ती के लिए 10 लाख,अन्ना भाउ साठे बस्ती 12 लाख,सावित्री बाई फुले 5 लाख, मान रास्ते के लिये 8 लाख रु. पथदिवे के लिए 1 लाख 14 हजार,बोरवेल,आंगनवाड़ी,मारोती सस्थान,त्रिमूर्ति तार कम्पाउंड 2 लाख रु. नाली बांधकाम 2 लाख रु. स्कूल दिरूस्ती 50 हजार रु. तथा वार्ड क्र 3 कुरूम रेलवे स्टेशन बस्ती में पंचशील विहार, स्मशान भूमि एवं मुस्लिम क्रबिस्तान के लिए 3 लाख रु ऎसे कुल 43 लाख 64 हजार रुपये मंजूर होकर काम शुरू कर दिया है। इस कारण मधापुरी ग्राम वासियो के आ गये अब अच्छे दिन .



