- "केबिनमेंन आनंद कुमार दास की सतरकर्त्ता से बची थी शेकडो रेल यात्रीयों की जान।"
- "मामला कुरुम में हाई वोल्टेज तार टूटकर रेल पटरी पर गिरने का
- अहमदाबाद हावड़ा एक्सप्रेस को हो सकता था बड़ा हादसा.
कुरुम :- शफ़ी खान
मध्य रेल के भुसावल मंडल में आनेवाला कुरुम रेलवे स्टेशन पर दि.27 फरवरी के दोहपर करीब3.30 बजे मुख्य बिजली का तार टूटकर पटरी पर गिर गया था। उस वक्त मूर्तिज़ापुर की और आ रही डाउन मेंन लाइन से अहमदाबाद हावड़ा सुपर फास्ट एक्सप्रेस कुछ ही मिनटों में कुरुम रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली थी। ऐसा वक्त बिजली का मेंन तार टूटकर पटरी पर गिरना बहुत गलत साबित हो सकता था। पूरी ट्रैन तार के चपेट में आकर शेकडो रेल यात्रियों को करंट लगकर जान से हाथ धोना पड़ सकता था।परंतु ये बात केबिन पर तैनात आनंद कुमार दास के ध्यान में आते ही स्टेशन मास्टर से संपर्क करके गाड़ी स्टेशन पर ही रुकवा दी। जिसके कारण बड़ा हादसा होते होते टला। और इस गाड़ी में सफर करने वाले शेकडो रेल प्रवासी बाल बाल बचे। ऐसे सतरकर्ता पूर्वक ड्यूटी करनेवाले जाबांज़ कर्मचारी एवं केबिनमेंन आनंद कुमार दास को भारतीय रेल प्रशासन की और से केवल एक बंद लिफाफे में 1000 रु राशि देकर उनकी चतुराई की तौहीन कर दी। जबकी 30 से 35 हजार रुपये वेतन लेने वाले केबिनमेंन आनन्द कुमार दास को भुसावल मंडल के DRM राम करण यादव के हाथों दि.12 मार्च2018 को अपने कार्यालय भुसावल बुलाकर बंद लिफाफे में इनाम दिया गया। इनाम के तौर पर बंद लिफाफ़ा हात में लेते वक्त आनंद कुमार काफी बौंने नजर आ रहे थे।और दिल ही दिल मे शर्मिंदगी महसूस कर रहे थे। जबकी केबिनमेंन आनंद कुमार ने बहुत महान काम करके हजारो रेल यात्रीओकी जान बचाई थी. अगर मानलो केबिनमेंन आनंद कुमार उस दिन दिमाख से काम नही लेते तो पूरी ट्रैन टूटे हुये बिजली तार के चपेट में आकर सभी रेल यात्री करंट के शिकार हो जाते। लेकिन ऐसी दुघटनाये रेल प्रशासन कि नजरो में मामूली सी दिखाई देती है। यही एक कारण हो सकता है केबिनमेंन आनंद कुमार को एक बंद लिफाफा इनाम के तौर पर देकर। रेल प्रशासन को याद दिला दे कि पिछले साल कुरुम परिसर में केवल माल ट्रेन का डिब्बा पटरी से उतरने पर यहा के पॉइंटमेंन रुगंनदास मिना को DRM राम कारण के ही हातो पुरस्कार, प्रमाण पत्र तथा इनाम दिया गया था। परंतु केबिनमेंन आनंद कुमार ने हजारों रेल यात्री की जान बचाई तो उसे केवल 1 हजार रुपये देकर अपमानित जैसा किया गया। ये रेल प्रशासन का कैसा न्याय है। यह तो वही क़िस्सा हो गया "मेहनत करे मुर्गा अंडा खाये फ़क़ीर" ऐसे वक्त पैसों की ऐमियत नही की जाती जब कि ऐसे वक्त उसका सत्कार करके पुरस्कार, प्रमाण पत्र देकर उसका हौसला अब्जाई किया जाता है। परन्तु यहां रेल प्रशासनद्वारा ऐसा कुछ नही किया। इस बात को लेकर केबिनमेंन आनंद कुमार काफी परेशान नजर आते है.
