55 ग्रामपंचायत को किया खुले मे शौच से मुक्त


रफीक कनोजे झरी: -तहसील खुले मे शौच मुक्त (ओडीएफ ) बनने की ओर अग्रसर है। अधिकारी व कर्मचारी के साथ-साथ ग्रामीण भी इस ड्रीम प्रोजेक्ट में सहयोग कर पिछले चार माह से शौचालय का निर्माण करवाकर अन्य के लिए मिसाल पेश की गई। अफसरों व कर्मियों ने कई गांव में रतजगा किया। सहयोग में ग्रामीण भी जुटे रहे, श्रमदान किया। अलसुबह रैली निकाली गई और कई गावोमे नुकड नाटिका भी आयोजित हुई। जिसके पस्चात 55 ग्रामपंचायत को किया खुले मे शौच से मुक्त हुये यवतमाल जिले के झरी तहसील के हर गाँव के तकरीबन 50 प्रतिशत लोग खुले में शौच करते थे। ऐसे में परिवर्तन लाना एक जटिल प्रक्रिया थी। ग्राम पंचायतों के लिए स्वच्छता से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती खुले में शौच करने (ओ डी) की प्रथा को समाप्त करने की थी। बीडीओ सुभाष चव्हाण, और साहायक बीडीओ शिवाजी गवई, तहसीलदार गणेश राऊत, 104 गांव के 55 ग्रामपंचायतके ग्रामसचीव, सरपंच, सभी जिला परीषद कर्मी, स्वास्थ विभाग, राजस्व विभाग, पुलीस प्रशासन और सामाजीक कार्यकर्ता महिलाओने ग्रामीणों को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए सरकार की मंशा के बारे मे बताया कि खुले में शौच जाने से विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं। दोनो बीडीओ ने कहा कि खुले में शौच जाने से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास नहीं हो पाता। इसके दुष्परिणाम की जानकारी दी शौचालयों का उपयोग करें। अन्य गांवों के लोगों को भी इससे प्रेरणा लेकर शौचालय बनवाने का आग्रह किया। उन्होंने बैठक में उपस्थित लोगों को खुले में शौच न जाने की शपथ भी दिलाई। इसके पश्चात गांव की महिला व पुरुष के साथ उन्होंने गुड मार्नींग पथक द्वारा गांव का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान शालाओंके विद्यार्थी के साथ ग्रामवासी भी लोटा, डब्बा बंद करो, खुले मे शौच बंद करो, बीमारियों को भगाना है, शौचालय बनवाना है आदि नारे भी निकाले। पांढरकवडा (छोटा) नीवासी कीरण पावडे और कुछ महिलाओंने गुड मार्नींग पथक बनाकर खुले मे शौच जाने वालो का झंडु के फूल देकर स्वागत कर शर्मसार किया गया शौचालयों के निर्माण से समस्या का समाधान हो जाएगा


शौचालयों के निर्माण पर जोरशोर से कार्ये किये गये। शौचालयों का प्रयोग होना भी जरुरी है। स्वच्छता एक आदत है और व्यवहार में परीवर्तन लाना एक जटील प्रक्रिया है। अतीत में स्वच्छता के व्यवहार में परिवर्तन लाना भी जरुरी है केवल शौचालयों के निर्माण से समस्या का समाधान हो जाएगा ये सोच भी रखना गलत है। आनेवालो दिनो मे पानी की समस्या निर्माण हो सकती है। शौचालय के उपयोग मे पानी की कमी बन सकती है। पानी की किल्लत पर भी प्रयास करना जरुरी है,

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