- आये दिन बर्बाद हो रहा हजारो लिटर पानी
- पेयजल के लिए इधर उधर भटक रहे है रेल कर्मियों का परिजन
- खोसला कंपनी के मनमाने करोभार से कुरम रेल कर्मचारी परेशान
- DRM साहब इधर ध्यान देंगे क्या?रेल कर्मियो का सवाल
शफ़ी खान
कुरुम :- मध्य रेल के भुसावल मंडल में तथा मूर्तिज़ापुर-बडनेरा के बीच आनेवाले ब्रिटिश कालीन कुरम रेलवे स्टेशन पर खोसला कंपनी के मनमाने करोभार से रेल कर्मियोंकी परेशानी बढ़ते ही जा रही है। और आये दिन परेशानीयां कम होने का नाम ही नही ले रही है। कभी धूल एवं ध्वनि प्रदूषण की परेशानी तो कभी बार बार पाइप लाइन फूटने के कारण पेयजल की परेशानी। ऎसे कई परेशानियों के चलते यहाँ के रेल कर्मी तथा उनका परिजनो का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
बता दे कि खोसला कंपनी रेल प्रशासन को गिट्टी पुराने का ढेका लेती है। और अपने भारी वाहनोसे तथा jcb मशिनोद्वारा रेल वैगन में लोडिंग अन लोडिंग करती है। जिस कारण यहा दिन रात धूल व ध्वनी प्रदूषण होती रहती है। और ऐसे भारी वाहनों से जमीन में बिछाई पेयजल पाइप लाइन बार बार फूटती है। जिससे रेल कर्मियों के परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। और पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। ऐसे गिट्टी भरकर चलनेवाले भारी वाहनो से एक बार क्या फुट गई पाइप लाइन तो उसे दुरुस्त करने में सप्ताह बित जाता है। वह इसलिए की खोसला कंपनी सोचती है रेल प्रशासन दुरुस्त करेगी और रेल प्रशासन सोचती है खोसला कंपनी दुरुस्त करेगी। दोनों के बवाल में सप्ताह बित जाता है। और ऐसे में यहा के रेल कर्मियों को पानी के लिए मारे मारे इधर उधर भटकना पड़ता है। ऐसा एक ही बार नही बार बार होता है। खोसला कंपनी के आतंग से यहा के रेल कर्मी ऊब चुके है।
इतना ही नही रेल कर्मियों के निवास स्थान के आजु बाजू खोसला कंपनी ने बड़े बड़े गिट्टी के चट्टे डाल कर रखे है। जिस के चलते आये दिन लोडिंग अन लोडिंग के कारण धूल व ध्वनि प्रदूषण बड़े पैमाने पर होता है। जिससे आये दिन लोगो को स्नान करना, कपड़ा धोना, रसोई तैयार करना,यहा तक की नाइट ड्यूटी करने के बाद नींद के लिए तरसना ऎसी कई बड़ी बड़ी समस्या निर्माण होती है। चौबीसों घंटे धूल और ध्वनि प्रदूषण से यहा के सभी कर्मचारी तंग हो चुके है। जिस कारण मजबूर होकर बहूत से कर्मचारियों ने अपना हेड क्वार्टर छोड़ कर परिवार के साथ बडनेरा अमरावती निवास करके रोज उप डाउन करते हुवे अपनी ड्यूटी करते नजर आते है।
ऎसे ही परेशानी के कारण सन 2009 में यहा के सभी रेल कर्मचारी मिलकर खोसला कंपनी की लेखी शिकायत भुसावल DRM को देकर यहा का गिट्टी डिपो बंद करवाया था। और करीब दो साल तक बंद रहा। परन्तु सन 2011 में रेल प्रशासन को गिट्टी की आवश्यकता होने के कारण रेलवे स्टेशन पास वाले गिट्टी डिपो को बंद करके रेल स्टेशन से एक कि.मि.अंतर पर अप लाइन साइडिंग में गिट्टी डिपो को निर्माण किया गया। जिस कारण किसी कर्मचारी को परेशानी ना हो। कुछ साल तो ठीक चला परन्तु अब खोसला कंपनी अपना मनमाना करोभार चलाने लगी है। फिर रेल कर्मचारियों के निवास स्थान के आस पास गिट्टी एव बड़े बडे बोल्डर जमा की जा रहा है।जिससे रेल कर्मियों के परिजनों की जान खतरे में पड़ गई है। इन दिनों बारिश का मौसम होने से साप बिछु का डर लग रहता है। और धूल ध्वनि प्रदूषण से कर्मचारियों का जीना मुश्किल हो गया है। उपर से भारी वहनो के कारण बार बार पेयजल की पाइप लाइन भी फूटते रहती है। इस कारण रेलवे स्टेशन के पासवाला गिट्टी डिपो बंद करना आवश्यक है। इस लिए इधर DRM साहब का ध्यान देना जरूरी हो गया है।ऐसा सवाल यहा के सभी रेल कर्मियो के जुबानी सुनने मिलता है


