कुरुम को धो डाला धुंवाधार बारिश ने


•दो दिनो से चल रही है परिसर में धुंवाधार बारिश।
•कुरुम परीसर का जन जीवन अस्त व्यस्त।
•नदी, नाले फिर उफान पर।
•सूख रही फसलों को मिला जीवन दान।
•किसानों में खुशियो का माहौल।
शफ़ी खान
कुरुम :- मूर्तिज़ापुर तहसील अंतर्गत आनेवाले कुरुम परिसर में करीब 20 दिनों ब्रेक बाद 15 अगस्त के सुबह से ही बारिश ने हल्की हल्की सी अपनी दस्तक लगाई थी। जैसे तैसे यहा स्कूलों में तिरंगा लहरा कर सभी छात्रों को छुट्टी दे दी गई थी।
              परन्तु 16 अगस्त के दोहपर 1 बजे से चली धुंवाधार बारिश ने तो पूरे कुरूम परिसर को जैसे धो ही डाला। जिसके चलते कुरुम परिसर का जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया था। नदी नालो को बाढ़ आने से किसानों के खेतों में तथा गांव में बारिश का पानी घुस ने से यहा के लोगो को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई लोगो के घर मे भी पानी घुस गया था। यदि मानलो ऎसी ही पूरी रात धुंवाधार बारिश चलती तो पिछली जैसी ही यहा बाढ़ जैसी परिस्थिति निर्माण हो जाती थी।
             फिलहाल यहा के किसानो मे खुशियो का माहौल नजर आ रहा है। वह इसलिए कि 20 दिनों से बारिश के बे रूखी के चलते यहां के कई किसानों की फसलें सूखने के कगार पर आ चुकी थी। जिन किसानों के पास सिचाई की व्यवस्था थी वह किसान अपनी फसले बचने के लिए रात दिन मेहनत मे जुटे हुवे थे। और जिन किसानों के पास सिचाई का साधन नही था वह बेचारे बहुत परेशान हाल थे। रोज वरुण राजा को मनाने जूट थे। इस कारण किसानों में कही खुशी कही गम का माहौल बना हुवा था। परंतु दो दिनो से चली धुंवाधार बारिश के कारण फिलहाल सभी किसानों में खुशियो का माहौल बना हुवा है। उनकी सुख रही फसलों को जैसा जीवनदान मिल गया है।
                  लगातार तीन सालों से नापीकी झेल रहे यहां के किसानों में इस बार भी उनके चहरो पर ना उम्मीद झलक रही थी। इसबार शुरुवात में ही पहली बारिश में ही यहा के किसानों का काफी नुकसान हुवा था। कई किसानों को तो दुबारा बुआई करनी पड़ी थी। जिसमे उनका लाखो रुपयों का नुकसान हुवा था। और अब बारिश के बे रूखी के कारण उनकी फैसले सूखने लगी थी। इस कारण यहा का किसान चिंता में डूबा हुवा था। परंतु दो दिनो से चल रही बारिश के चलते उनकी चिंता दूर हो गई है।
फोटो में खेतों में जमा पानी। जिस कारण फसलों को मिला जीवन दान।

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