अलीगढ में गुंडागर्दी और पुलिस द्वारा छात्रों हमला क़ाबिले मज़म्मत




  • जमीअत उलमा ए हिन्द के नेता मौलाना महमूद  मदनी की छात्रों से अपील को वह ज़िद छोड़ कर फ़िरक़ापरस्तों की साज़िश को नाकाम बना दें


नई दिल्ली :- जमीअत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मोहम्मद अली जिन्नाह की तस्वीर को लेकर उत्पन्न स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि हालांकि जिन्नाह की तस्वीर ऐसा मुद्दा नहीं है जिसके लिए छात्र अपनी जान और इज़्ज़त का  बलिदान पेश करें, हमारे बुजुर्गों ने जिन्नाह को अपना आदर्श नहीं माना और न ही उनके सिद्धांत का समर्थन किया बल्कि इस देश में हमारा रहना ही इस बात का प्रतीक है कि हम ने उनके द्विराष्ट्र सिद्धांत को सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन उसके बावजूद सिर्फ तस्वीर को बहाना बनाकर जिस तरह से  फ़िरक़ापरस्त प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय में विरोध किया और प्रशासन और पुलिस ने निहत्थे छात्रों पर लाठियों से हमला किया वह किसी भी लोकतांत्रिक देश में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इस तरह से देश की बड़ी विश्वविद्यालय को निशाना बनाया जाना भी निंदनीय है।

मौलाना मदनी ने कहा कि निजी समूहों  द्वारा शक्ति का उपयोग देश को  अराजकता और बर्बादी की ओर ले जाएगा, यह बहुत ही दुख की बात है कि राष्ट्रीय हित की अनदेखी करके ऐसे तत्वों को देश के कुछ प्रभावशाली लोग पोसने का काम कर रहे हैं। कुछ लोगों की सांप्रदायिक उत्तेजनाओं के कारण हमारे ऊपर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उंगली उठाई जा रही है कि हमारा रवैया अल्पसंख्यकों, उनके धर्मों और उनके संस्थानों के प्रति निष्पक्ष नहीं है। अब इस तरह की की गुंडागर्दी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे देश की और बदनामी होगी।

मौलाना मदनी ने इस अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों  से दरदमन्दाना अपील की कि वह सबर के साथ अपने पुराने धर्मनिरपेक्ष परंपराओं का दामन मजबूती से पकड़े रहें, खुदा के लिए साम्प्रदायिक ताक़तों को कभी सफल न होने दें, सांप्रदायिक ताक़तें मूल मुद्दों से देश का ध्यान हटाना चाहती हैं। क्या आप भी यही चाहेंगे कि वह अपने लक्ष्य में सफल हो जाएं और मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान हट जाए. आप अगर साम्प्रदायिक ताक़तों को विफल करना चाहते हैं तो आप को इस मुद्दे पर जिद छोड़ देना चाहिए और वहां से तस्वीर  हटा लेना चाहिए, प्रिय छात्रों को  यह समझना चाहिए कि यह एक षड्यंत्र है और षड्यंत्र को नाकाम बनाना ही अकल का तक़ाज़ा है.

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