किसी महिला को सिर्फ अगवा करने से ही आईपीसी की धारा 366 के तहत मामला नहीं बनता : सुप्रीम कोर्ट



सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ किसी महिला को अगवा भर करने और और इस बात का कोई सबूत नहीं होने से कि ऐसा किसी व्यक्ति के साथ जबरन शादी करने या उसके साथ संभोग के लिए बाध्य करने के लिए किया जा रहा है, आईपीसी की धारा 366 के तहत मामला नहीं बनता। शुरू में ज.शुरू में जो एफआईआर दायर किया गया था उसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी जबरदस्ती उसको अपने घर ले गया . 

पांच दिन बाद, एक पूरक बयान दिया गया जिसमें शिकायतकर्ता ने कपड़े उतरवाने और गलत तरीके से छूने और छेड़खानी का आरोप भी शामिल कर दिया। शिकायतकर्ता ने सुप्रीम . न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल ने इस बात पर गौर किया कि शुरू में शिकायत में छेड़छाड़ की बात को शर्म के मारे शामिल नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा, “इस बारे में जो बताया गया है . 

 वह आत्मविश्वास पैदा नहीं करता क्योंकि एफआईआर घटना के पांच दिन.पीठ ने कहा, “जहाँ तक आईपीसी की धारा 366 की बात है, सिर्फ यह बताना पर्याप्त नहीं है कि महिला को अगवा किया गया था, आगे यह भी साबित किया जाना जरूरी है कि आरोपी ने महिला को उससे शादी करने के लिए बाध्य करने या फिर उसके उसके साथ गैरकानूनी तरीके से सहवास के. कोर्ट ने कहा कि अगर यह साबित भी हो जाता है कि आरोपी उसको जबरदस्ती अपने घर ले गया, पर बाद में उसने जो बयान दिया कि उसकी इच्छा उससे शादी करने या उसको बहला फुसला कर उसके साथ संभोग करने की थी, वह महज एक बाद का विचार है।  ज्यादा से ज्यादा यह कहा जा सकता है.

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