स्टेशन प्रबंधक के अनदेखी का नतीजा | हर माह आते है साफ सफाई के लिए 10 हजार रुपये | स्वछता अभियान को स्टेशन प्रबंधक का ढेंगा .
कुरुम 17 जनवरी 18 शफ़ी खान जहाँ एक तरफ सरकार लाखो रुपये खर्च करके पुरे भारत में स्वछता अभियान चलाया जा रहा है वही दूसरी तरफ कुरुम रेलवे के स्टेशन प्रबंधक जि एम बावने मोदी सरकार के स्वछता अभियान को ढेंगा बताते नजर आ रहे है। रेल प्रशासन की और से हर माह साफ सफाई के लिए 10 हजार रुपये यहाँ आते है। परंतु ये पूरी रकम कहाँ खर्च कि जाती पता नही चलता।आये दिन यहाँ के प्लेटफार्म पर गंधगी भरा माहौल नजर आता है। जिस के चलते यहाँ से हर गुजर ने वाला रेल यात्री परेशान होता है। उसे सवारी गाड़ी आनेे के इन्तेजार में गंधगी के साये में वक्त गुजारना पड़ता है. बता दे के कुरुम रेलवे स्टेशन ये ब्रिटिश कालीन बना हुवा है। ये स्टेशन छोटा जरूर है परंतु इसके आस पास 8 से 10 देहातो का समावेश है। औऱ खास बात यह है की रस्ते का खस्ता हाल होने से यहा कोई सरकारी बस नही पहुचती । और राष्ट्रीय राज मार्ग क्र 6भी यहां से करीब 8 से 10 की मि दूर अंतर पर पड़ता है । इसी कारण सभी देहात वासियो को सस्ती और अछि रेल सुविधा पड़ती है। इस रेल स्टेशन पर केवल पैसेंजर गाड़िया ही रुकती है.अमरावती वर्धा नागपुर तथा मूर्तिजपुर अकोला शेगाव के लिये यहाँ से आये दिन शेकडो रेल यात्री गुजरते है. महिला शौचालय का भी हाल क़ुछ ऐसा ही नजर आता है। दूर दराज से महिला यात्री यहां आने के बाद शौच के लिए इधर उधर भटकती नजर आती है। प्लेटफार्म पर शौचलय जरूर है परंतु गंधगी से पटा पड़ा है। इस कारण महिला उस मे शौच के लिए जाने कतराती है। बता दे कि स्टेशन कार्यलय के पास नया शौचलय निर्माण किया गया है। परंतु उस पर भी ताला लटकता हुवा नजर आता है। इस कारण प्लेटफार्म की गंधगी और शौचालय की दुर्गंध से हर आने जाने वाला रेल यात्री परेशान दिखाई देता है.एक रेल कर्मी से मिली जानकारी अनुसार यहाँ एक 3 हजार रुपये प्रतिमाह से सफाई कामगार रखा गया है। परंतु वह भी सप्ताह में एखाद बार साफ सफाई करते नजर आता है। और बाकी दिन कर्मचारीयो का घर काम करते नजर आता है।
हर माह रेल प्रशासन की और से साफ सफाई के लिए कुरुम रेल स्टेशन को 10 हजार रुपये मिलते है। उसमें से हर माह साफ सफाई पर केवल 3 हजार रुपये ही खर्च किये जाते है।बाकी बचा पैसा कहां खर्च किये जाते है वह अब तक पता नही चल पाया। इस कारन संबधित अधिकारियों को कुरुम रेलवे स्टेशन की और ध्यान देना अब जरूरी है। ऐसा यात्रियों के जुबानी सुनने मिल रहा है.
कुरुम 17 जनवरी 18 शफ़ी खान जहाँ एक तरफ सरकार लाखो रुपये खर्च करके पुरे भारत में स्वछता अभियान चलाया जा रहा है वही दूसरी तरफ कुरुम रेलवे के स्टेशन प्रबंधक जि एम बावने मोदी सरकार के स्वछता अभियान को ढेंगा बताते नजर आ रहे है। रेल प्रशासन की और से हर माह साफ सफाई के लिए 10 हजार रुपये यहाँ आते है। परंतु ये पूरी रकम कहाँ खर्च कि जाती पता नही चलता।आये दिन यहाँ के प्लेटफार्म पर गंधगी भरा माहौल नजर आता है। जिस के चलते यहाँ से हर गुजर ने वाला रेल यात्री परेशान होता है। उसे सवारी गाड़ी आनेे के इन्तेजार में गंधगी के साये में वक्त गुजारना पड़ता है. बता दे के कुरुम रेलवे स्टेशन ये ब्रिटिश कालीन बना हुवा है। ये स्टेशन छोटा जरूर है परंतु इसके आस पास 8 से 10 देहातो का समावेश है। औऱ खास बात यह है की रस्ते का खस्ता हाल होने से यहा कोई सरकारी बस नही पहुचती । और राष्ट्रीय राज मार्ग क्र 6भी यहां से करीब 8 से 10 की मि दूर अंतर पर पड़ता है । इसी कारण सभी देहात वासियो को सस्ती और अछि रेल सुविधा पड़ती है। इस रेल स्टेशन पर केवल पैसेंजर गाड़िया ही रुकती है.अमरावती वर्धा नागपुर तथा मूर्तिजपुर अकोला शेगाव के लिये यहाँ से आये दिन शेकडो रेल यात्री गुजरते है. महिला शौचालय का भी हाल क़ुछ ऐसा ही नजर आता है। दूर दराज से महिला यात्री यहां आने के बाद शौच के लिए इधर उधर भटकती नजर आती है। प्लेटफार्म पर शौचलय जरूर है परंतु गंधगी से पटा पड़ा है। इस कारण महिला उस मे शौच के लिए जाने कतराती है। बता दे कि स्टेशन कार्यलय के पास नया शौचलय निर्माण किया गया है। परंतु उस पर भी ताला लटकता हुवा नजर आता है। इस कारण प्लेटफार्म की गंधगी और शौचालय की दुर्गंध से हर आने जाने वाला रेल यात्री परेशान दिखाई देता है.एक रेल कर्मी से मिली जानकारी अनुसार यहाँ एक 3 हजार रुपये प्रतिमाह से सफाई कामगार रखा गया है। परंतु वह भी सप्ताह में एखाद बार साफ सफाई करते नजर आता है। और बाकी दिन कर्मचारीयो का घर काम करते नजर आता है।
हर माह रेल प्रशासन की और से साफ सफाई के लिए कुरुम रेल स्टेशन को 10 हजार रुपये मिलते है। उसमें से हर माह साफ सफाई पर केवल 3 हजार रुपये ही खर्च किये जाते है।बाकी बचा पैसा कहां खर्च किये जाते है वह अब तक पता नही चल पाया। इस कारन संबधित अधिकारियों को कुरुम रेलवे स्टेशन की और ध्यान देना अब जरूरी है। ऐसा यात्रियों के जुबानी सुनने मिल रहा है.

