वाशिंगटन/ संयुक्त राष्ट्र, 17 जनवरी अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या मुसलमानों की स्वेच्छा से और सुरक्षित म्यामां लौटने की बात पर आज जोर दिया. म्यामां के उत्तरी रखाइन प्रांत में रोहिंग्या विद्रोहियों के खिलाफ 25 अगस्त को सेना की कार्रवाई के बाद से अब तक 655,000 मुसलमान अल्पसंख्यक सीमा पार कर बांग्लादेश भाग चुके हैं. अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमारे लिए समयसीमा कम महत्व रखती है ज्यादा महत्व इस बात का है कि लोग स्वेच्छा से और सुरक्षित रूप से घर लौट सकें उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि लोगों को वापस अपने घर या अपने समुदायों के पास तब जाने के लिए मजबूर किया जाए जब वे वहां लौटना सुरक्षित महसूस नहीं करते हों.वह रोहिंग्या लोगों की स्वदेश वापसी पर बांग्लादेश और म्यामां के बीच हुए समझौते पर एक सवाल का जवाब दे रही थीं। समझौते के मुताबिक रोहिंग्या लोगों की स्वदेश वापसी के लिए दो साल की समयसीमा तय की गई है इस बीच संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित और स्वैच्छिक वापसी पर जोर दिया. गुतारेस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करना अहम है कि यह वापसी स्वैच्छिक हों, सुरक्षा और सम्मान के साथ हो तथा लोगों को उनके मूल स्थानों पर लौटने की अनुमति मिले जिसका मतलब है कि बहुत बड़े निवेश की जरुरत है क्योंकि पुनर्निर्माण का बहुत सारा काम करना है तथा सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता है.
अमेरिका, संरा ने दिया रोहिंग्या की सुरक्षित, स्वैच्छिक म्यामां वापसी पर जोर
वाशिंगटन/ संयुक्त राष्ट्र, 17 जनवरी अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्या मुसलमानों की स्वेच्छा से और सुरक्षित म्यामां लौटने की बात पर आज जोर दिया. म्यामां के उत्तरी रखाइन प्रांत में रोहिंग्या विद्रोहियों के खिलाफ 25 अगस्त को सेना की कार्रवाई के बाद से अब तक 655,000 मुसलमान अल्पसंख्यक सीमा पार कर बांग्लादेश भाग चुके हैं. अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमारे लिए समयसीमा कम महत्व रखती है ज्यादा महत्व इस बात का है कि लोग स्वेच्छा से और सुरक्षित रूप से घर लौट सकें उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि लोगों को वापस अपने घर या अपने समुदायों के पास तब जाने के लिए मजबूर किया जाए जब वे वहां लौटना सुरक्षित महसूस नहीं करते हों.वह रोहिंग्या लोगों की स्वदेश वापसी पर बांग्लादेश और म्यामां के बीच हुए समझौते पर एक सवाल का जवाब दे रही थीं। समझौते के मुताबिक रोहिंग्या लोगों की स्वदेश वापसी के लिए दो साल की समयसीमा तय की गई है इस बीच संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित और स्वैच्छिक वापसी पर जोर दिया. गुतारेस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करना अहम है कि यह वापसी स्वैच्छिक हों, सुरक्षा और सम्मान के साथ हो तथा लोगों को उनके मूल स्थानों पर लौटने की अनुमति मिले जिसका मतलब है कि बहुत बड़े निवेश की जरुरत है क्योंकि पुनर्निर्माण का बहुत सारा काम करना है तथा सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता है.
