मोदी बोले- योगीजी भी कम खिलाड़ी नहीं हैं


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये युवा महोत्सव को संबोधित किया. स्वामी विवेकानंद की जयंती पर हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है.पीएम मोदी ने ग्रेटर नोएडा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद के कथनों से जोड़कर आज के समय में सीख लेने की प्रेरणा दी.प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ट्विटर स्किल्स की भी तारीफ़ की.उन्होंने कहा, "योगीजी भी कम खिलाड़ी नहीं हैं. कई राज्यों में बहुत लोगों के साथ हमारे योगीजी ट्विटर-ट्विटर का खेल खेल रहे हैं. और ट्विटर के खेल में भी अच्छे-अच्छे खिलाड़ियों को उन्होंने परास्त करके रख दिया है."नरेंद्र मोदी के भाषण की सात प्रमुख बातें.1. प्रधानमंत्री ने मॉक पार्लियामेंट का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज से ही राष्ट्रीय युवा महोत्सव की शुरुआत हो रही है. नेशनल यूथ अवॉर्ड पाने वाले छात्रों और संस्थाओं की बधाई देता हूं.मोदी ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि यहां अगले चार दिनों में बहुत से कार्यक्रम होंगे. नेशनल यूथ पार्लियामेंट का भी आयोजन किया जाएगा. मैंने इस बार 'मन की बात' करते हुए भी देश के हर जिले में मॉक पार्लियामेंट के आयोजन का विचार रखा था.
यह उसी विचार की एक कड़ी की तरह है.2. प्रधामनंत्री ने अपने संबोधन में महोत्सव की थीम 'संकल्प से सिद्धि' को भी समझाया. उन्होंने कहा कि हमने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा तो नहीं लिया, लेकिन उन सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी हमारी है जिन्हें आजादी के दीवानों ने देखा था. जब हम उस सपने को देखेंगे और जियेंगे तो उसका संकल्प लेना भी आसान होगा.3. नरेंद्र मोदी ने कहा कि नया भारत कैसा होगा, जब आप दिन भर के कार्यक्रम के बाद रात में अपने कमरे में सोने जायें तो यह जरूर सोचिएगा कि आपके आसपास क्या बदलना चाहिए.आपको महसूस होगा कि उसे जरूर बदलना चाहिए. आज जो आप संकल्प लेंगे वो ही सिद्ध होकर देश को भी अपने संकल्पों की पूर्तिं के लिए तैयार करेगा. आपकी इस यात्रा में सरकार भी, पूरा हिंदुस्तान भी हर तरह से आपके साथ है.4. मैं चाहता हूं कि देश का नौजवान जॉब क्रिएटर बने. इनोवेटिव चीजें करने के लिए युवा आगे आएं. किताब में पढ़ना कि हवाई जहाज कैसे बनता है, उसकी बारीकियों को समझना, ये सब शिक्षा है. लेकिन, कौशल होने पर ही कोई हवाई जहाज उड़ा सकता है. सिर्फ शिक्षा हो और कौशल न हो तो रोजगार मिलने में मुश्किल होती है.इसलिए हम कौशल बढ़ाने पर फोकस करते हैं. इसके लिए स्किल इंडिया कार्यक्रम चलाया जा रहा है और इंडिया इंटरनेशनल स्किल सेंटर भी खोले जा रहे हैं. प्रधानमंत्री युवा योजना के तहत 3000 संस्थानों में छात्रों को ट्रेनिंग देने का काम तेजी से चल रहा है.5. कुछ लोग कहते हैं कि आज के युवा में धैर्य नहीं है लेकिन यही बात आज के नौजवानों के लिए गंभीर इनोवेशन का मार्ग बन जाती है. हममें धैर्य होना चाहिए लेकिन ऐसा ना हो कि व्यक्ति बिल्कुल ठहर जाए.आपके इनोवेशन सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं. इनोवेशन की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अटल इनोवेशन मिशन शुरू किया है. उनकी क्रिएटिविटी को बढ़ाने के लिए अटल टिंकरिंग लैब को भी स्वीकृति दी गई है.
सरकार ने 10 हजार करोड़ की राशि से स्टार्टअप फंड बनाया है. युवा अपने इनोवेशन का पेटेंट करा सकें इसके लिए कानूनी मदद दी जा रही है. जब आप कॉलेज से निकलेंगे और अपना कुछ नया काम करेंगे तो इन सभी पहलों से आपको मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री बातों-बातों में राहुल गांधी पर भी निशाना साध गए. उन्होंने कहा कि दुनिया में हर कोई सुविधा पाकर आगे बढ़ा है ये जरूरी नहीं है. संघर्ष करके भी आगे बढ़ा जा सकता है. कई विदेशी कंपनियों को बढ़े स्तर पर भारतीय चला रहे हैं.राजनीतिक वंशवाद वाले स्टाइल में क्या वे सीधे वहां पहुंच गए हैं? उन्होंने संघर्ष किया है और मेहनत की है. आपने देखा कि दो दिन पहले ही आंचल ठाकुर ने भारत को स्कीइंग में पहला मेडल दिलाया है. मानुषी छिल्लर ने देश का नाम रोशन किया है. सागर परिक्रमा के लिए छह बेटियां निकली हुई हैं. पीएम मोदी ने खेलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि खेल शिक्षा का भी तरीका है. ये शरीर और मस्तिष्क दोनों को स्वस्थ रखता है. खेल का मैदान हार का मतलब समझाता है और जीत को पचाना सीखाता है.उन्होंने युवा एंव खेल मामलों के राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर का जिक्र करते हुए उनके खेल में योगदान की तारीफ की. साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी खेलों में रूचि बताई.मोदी ने कहा कि योगी ने ट्विटर पर खेल-खेल में बड़े खिलाड़ियों को हराया है.अंत में नरेंद्र मोदी ने योग के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने युवाओं को कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए कहा.उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर, देश के नौजवान और देशवासी अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाएं. विवेकनंद के दिखाए गए सामाजिक समरसता, ऊंच-नीचे के खात्मे और राष्ट्र के लिए जीने मरने के मार्ग को अपनाएं.


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