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यह कानून देश के संविधान और एकता को तोड़ने वाला है :मौलाना महमूद मदनी

यह कानून देश के संविधान और एकता को तोड़ने वाला है :मौलाना महमूद मदनी



  • जमीयत उलेमा ए हिंद के नेतृत्व में देश के हज़ारों शहरों में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ धरना और प्रदर्शन ।


नई दिल्ली :- विवादित नागरिकता संशोधन बिल 2019 के लोकसभा और राज्यसभा से मंज़ूरी के खिलाफ़ आज जमीयत उलेमा ए हिंद की विभिन्न यूनिटों की ओर से देश भर में लगभग 2000 से अधिक शहरों में विरोध प्रदर्शन किए गए।

नई दिल्ली में जंतर मंतर पर हुए विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व महासचिव जमीयत उलेमा ए हिंद मौलाना महमूद मदनी ने किया।

आज देश भर के बहुत सारे बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, जयपुर , बेंगलुरु ,हैदराबाद, विजयवाड़ा,  नलगुंडा , पश्चिमी बंगाल गोदावरी, कोलकाता ,भोपाल ,अहमदाबाद पुणे, सूरत, चंडीगढ़, बनारस, कानपुर, देवबंद, लखनऊ, ग्वालपाड़ा ,अगरतला इत्यादि में भी हज़ारों हज़ार प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न प्ले कार्ड और ज़ोरदार नारों के माध्यम से अपने गुस्से और विरोध को प्रकट किया। इस अवसर पर लोगों ने जो प्लेकार्ड अपने हाथों में उठा रखे थे उन पर बहुत सारे नारे लिखे हुए थे जिनमें संविधान बचाओ, नागरिकता कानून वापस लो, धार्मिक भेदभाव बर्दाश्त नहीं, कैब बंटवारे की साज़िश है, एक मुल्क़  एक  कौम। हम इस फासीवादी कानून की निंदा करते हैं। कैब भारत के ख़िलाफ़ साज़िश ,आदि आदि।

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि यह कानून देश के संविधान के ख़िलाफ़ और देश तोड़ने वाला है। हम इसको मुसलमानों के खिलाफ़ नहीं बल्कि देश के खिलाफ़ समझते हैं । उन्होंने कहा कि मैं नौजवानों से कहता हूं कि शांति और सद्भाव कायम रखें । हम बुजदिल नहीं हैं और जिसके सीने में ईमान है वह भी  बुजदिल नहीं  होता । लेकिन मुसलमान एक जिंदा कौम हैं और जिंदा कोमों को परेशानियां होती ही हैं मगर वह इस परेशानी से निकलने का मार्ग भी निकालती हैं । मौलाना मदनी ने कहा कि आज जमीयत उलेमा ए हिंद के नेतृत्व में पूरे देश में लगभग 2000 शहरों और हज़ारों कस्बों देहातों में विरोध हो रहा है ।

यहां दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर पुलिस ने लोगों को रोक रखा है मुझे यहां आने में एक घंटा लग गया । हम आपसे सिर्फ इतना कहते हैं कि सम्मान पूर्वक जीवन गुजारने के लिए साहस, विश्वास और निर्भीकता के साथ-साथ सब्र और बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन आवश्यक है ।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जमीयत उलेमा ए हिंद के सेक्रेटरी मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी ने कहा कि कुछ लोग यह कह रहे हैं कि बिल पास हो गया है , अब प्रदर्शन से कोई लाभ नहीं है , मैं कहता हूं कि अब तो लड़ाई की शुरुआत हुई है। दूसरी बात यह है कि मुसलमान कभी लाभ और हानि का हिसाब करके हक के लिए आवाज़ बुलंद नहीं करते बल्कि वह इसलिए ऐसा करते हैं क्योंकि उनका ईमान उन्हे हक बोलने का हुक्म देता है । उन्होंने कहा कि देश के संविधान की लड़ाई इस समय की वक्ती लड़ाई नहीं बल्कि इसके लिए लगातार संघर्ष की आवश्यकता है । इस अवसर पर देशभर में विरोध प्रदर्शनों और सभाओं के बाद, जिला अधिकारी, एसडीएम के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के नाम एक मेमोरेंडम भी दिया गया है। दिल्ली में विधिवत यह मेमोरेंडम दिया गया है.


  •  जमीअत उलमा हिंद के माध्यम से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि..


  1.  हम, जमीयत उलमा-ए-हिंद के सदस्य और समर्थक विनम्रतापूर्वक महामहिम का ध्यान ‘‘नागरिकता संशोधन विधेयक 2019’’ की ओर दिलाना चाहते हें जोकि प्रत्यक्षतः सांप्रदायिकता से प्रेरित है हम इस क़ानून की निन्दा करते है क्योंकि यह विधेयक भारत की नागरिकता के लिए धर्म को कानूनी आधार बनाता है। इसका उद्देश्य तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़गानिस्तान से आने वाले उत्पीडित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता देना बताया गया है लेकिन यह विधेयक धर्म के आधार पर उनमें भेदभाव करता है। इस से धर्म के आधार पर नागरिकता को विभाजित करने की मंशा स्पष्ट प्रतीत होतर है। इस तरह यह देश के बहुलवादी ताने-बाने का उल्लंघन करता है।
  2. हमारे देश का चित्र जो हमारे स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र के निर्माताओं के विचारों और हमारे संविधान में निहित उसूलोें से निकला है, वह एक ऐसे देश का है जो सभी धर्मों के लोगों के साथ समान व्यवहार करने पर वचनबद्ध है। संबंधित बिल में नागरिकता के लिए एक मानदंड के रूप में धर्म का उपयोग देश केे इस इतिहास में विराम को चिन्हित करेगा जो कि कट्टरपंथ पर आधारित है। यह विराम संविधान की मूल भावना और संरचना के साथ असंगत होगा।
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में हर व्यक्ति को क़ानून के सामने समानता दी गई  है और राज्य को किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके धर्म, जाति या पंथ के आधार पर क़ानून के सामने भेदभाव करने से रोका गया है। ऐसा करना समानता के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित यह विधेयक संविधान की भावना और इसकी मूल संरचना का उल्लंघन करता है।
  4. यह बिल असम समझौते 1985 का भी उल्लंघन करता है जो असम में अवैध रूप से आ बसने वाले विदेशियों का पता लगाने के लिए कट-ऑफ तारीख के रूप में 25.03.1971 तय करता है। इस प्रकार मनमाने ढंग से इस समझौते की अनदेखी से उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल में खलल पड़ रहा है।
  5. हम इस असंवैधानिक और अमानवीय बिल को अस्वीकार करते हैं और अपने महान देश के सभी न्याय-प्रेमी और धर्मनिरपेक्ष नागरिकों से अपील करते हैं कि वे सामूहिक रूप से शांतिपूर्ण तरीक़ें से अपनी आवाज उठाएं और इसके क्रियान्वयन को रोकने के लिए हर संभव कानूनी तरीके से इस का विरोध करें।
  6. हम भारत के माननीय राष्ट्रपति से अपील करते हैं कि वे इस कानून के माध्यम से लोगों के साथ अन्याय और सांप्रदायिकता के लक्ष्य को रोकने के लिए अपने गरिमापूर्ण पद के प्रभाव का उपयोग करें। हम भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय से भी अपील करते हैं कि वह निंदनीय कानून का स्वंय संज्ञान ले, जिस के लागू हो जाने से संविधान की मूल संरचना नष्ट हो जाएगी।

जंतर मंतर नई दिल्ली के प्रदर्शन का प्रबंध  जमीयत उलेमा ए दिल्ली ने किया था । इस अवसर पर जमीयत उलमा ए दिल्ली राज्य के सभी पदाधिकारी मौजूद थे । कई  सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जमीयत उलेमा के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया और सभा को संबोधित किया । इसी तरह पूरे देश में लोगों ने जुमे के बाद सड़क पर निकलकर या इकट्ठा होकर इस बिल का विरोध किया ।

इस्लामपुर पश्चिमी बंगाल में जमीअत उलमा ए हिंद के सचिव  मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने शिरकत की। जबकि कोलकाता में मौलाना सदीकउल्ला चौधरी, पटना में मौलाना मोहम्मद नाज़िम, किशनगंज में मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी, मौलाना जावेद इक़बाल,

 कानपुर में मौलाना मतीनउल हक ओसामा जयपुर में मौलाना शब्बीर अहमद कासमी, अहमदाबाद में प्रोफेसर निसार अहमद अंसारी , मुफ्ती असजद कासमी, हैदराबाद में हाफिज पीर शब्बीर अहमद, मुंबई के आजाद मैदान में मौलाना हाफ़िज़ नदीम सिद्दीकी, बेंगलुरु में मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी, मुफ्ती शमसुद्दीन बिजली लखनऊ में सैयद हसीन अहमद , भोपाल में कलीम अहमद, चेन्नई में मुफ्ती मंसूर अहमद , हाजी मोहम्मद हसन ,अगरतला में मुफ्ती अब्दुल मोमिन, चंडीगढ़ में मौलाना अली हसन मजाहीरी , मेवात में मौलाना याहिया करीमी, जाजपूरा , उड़ीसा में मौलाना मोहम्मद जाबिर, रांची में मौलाना अबू बकर कासमी, देहरादून में मौलाना आरिफ कासमी, मौलाना हारून कैराना यूपी में मौलाना मोहम्मद आकिल, सहारनपुर में मौलाना मोहम्मद मदनी, मौलाना जहूर कासमी और जहीन अहमद में नेतृत्व किया।
अयोध्या मामला पर बोले अरशद मदनी हमें अदालत पर पूरा विश्वास है,हम न्याय चाहते हैं,और फैसला सबूत के आधार पर होगा.

अयोध्या मामला पर बोले अरशद मदनी हमें अदालत पर पूरा विश्वास है,हम न्याय चाहते हैं,और फैसला सबूत के आधार पर होगा.


नई दिल्ली :- सुप्रीम कोर्ट में आज राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आवेदक गोपाल सिंह ने कोर्ट से कहा कि इस मुद्दे में मध्यस्थता काम नहीं कर रही है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को ही कोई निर्णय सुनाना चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि हम मध्यस्थता का समय दिया, उसकी रिपोर्ट आने में अभी समय है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।

न्यूज़ 18 उर्दू के अनुसार जमीअत के सदर मोलाना सैयद अरशद मदनी ने आज कानूनी प्रगति पर अपने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम तो शुरू से चाहते हैं कि अदालत इस मामले में अपना फैसला दे, लेकिन जब अदालत सामंजस्य द्वारा इसका समाधान चाहती थी और इसके लिए औपचारिक तौर पर सुलह कारों का एक पैनल भी स्थापित कर दिया था इसलिए अदालत की इच्छा का सम्मान करते हुए हम सामंजस्य कारों के साथ सहयोग किया और उनके सामने अपना पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि हम अदालत का न केवल सम्मान करते हैं बल्कि उस पर भरोसा भी करते हैं हम न्याय चाहते हैं और हमें विश्वास है कि अदालत बस आस्था के आधार पर कोई फैसला नहीं करेगी बल्कि इसका फैसला सबूत के आधार पर होगा।
जमीअत का विशाल शताब्दी समारोह देवबंद में नवंबर २०२० में मनाया जाएगा.

जमीअत का विशाल शताब्दी समारोह देवबंद में नवंबर २०२० में मनाया जाएगा.



  • मोबलीचिंग  जैसी अमानवीय घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली में 4 अगस्त को जमीअत का 
  • ऐतिहासिक  सम्मलेन 


नई दिल्ली :- जमीयत उलेमा ए हिंद के शताब्दी वर्ष समारोह की तैयारियों के संबंध में आज मदनी हाल कार्यालय जमीयत उलेमा ए हिंद में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद ने की, बैठक में संस्था के सभी राज्यों के अध्यक्षों और  महा सचिवो ने भाग लिया जिन्होंने जमीयत के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह के आयोजनों का जायजा लिया और भविष्य में आयोजित होने वाले प्रोग्रामों को सफल, प्रभावशाली और संदेश जनक बनाने के कार्यक्रम पर विचार किया. विशेषकर देवबंद में आयोजित होने वाले विशाल शताब्दी वर्ष समारोह से संबंधित कई मामलों पर विशेष चर्चा की.
 इस अवसर पर संबोधित करते हुए मौलाना महमूद मदनी जनरल सेक्रेट्री जमीयत उलेमा ए हिंद ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद का 100 साल का इतिहास पूरे देश और मिल्लत इस्लामिया का इतिहास है जिससे न सिर्फ हमारा संघर्ष, कुर्बानियां और उपलब्धियां जुड़ी हुई हैं बल्कि नई पीढ़ी के लिए इसमें मार्गदर्शन भी है. इसलिए इस बात की आवश्यकता है कि शताब्दी समारोह के आयोजन और प्रोग्रामों को जिला और राज्य स्तर पर भी आयोजित किये जाएं और जमीयत उलेमा हिंद के महापुरुषों पर और ज्यादा सेमिनार और कान्फ्रेंस आयोजित करके जमीयत के संदेश को अधिक  सार्वजनिक किया जाए.

 इसलिए पूरे विचार करने के बाद तय हुआ कि देवबंद में  विशाल शताब्दी वर्ष का समारोह २०, २१, २२ नवंबर 2020 को आयोजित किया जाए और इससे पहले सारे राज्यों  की जमीयत अपने-अपने क्षेत्रों में जमीयत से जुड़े हुए महापुरुषों पर सेमिनार और प्रोग्राम आयोजित करें दूसरी ओर जहां जमीयत के महापुरुषों पर सेमिनारों का सिलसिला जारी है वहीं यह भी निर्णय किया गया कि महापुरुषों पर डॉक्यूमेंट्री भी तैयार कराई जाए, जहां तक सेमिनार का संबंध है तो 27 - 28 जुलाई 2019 को दिल्ली में हजरत मौलाना अहमद सईद देहलवी रहमतुल्लाह   पूर्व अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद और मौलाना हिफजुर रहमान स्योहारावी  पूर्व महासचिव जमीयत उलेमा ए हिंद की सेवाओं पर सेमिनार  आयोजित हो रहा है,  इसके अलावा 21 -22 सितंबर 2019 को हजरत मौलाना अब्दुल बारी फिरंगी महली रह संस्थापक जमीअत उलेमा ए  हिंद मौलाना मुफ्ती किफायतुलला पूर्व अध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद, हजरत अल्लामा सैयद फखरुद्दीन मुरादाबादी की सेवाओं पर सेमिनार आयोजित होगा बैठक में यह प्रस्ताव आया कि हजरत शेखउल हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी, हजरत शेख उल इस्लाम मौलाना हुसैन अहमद मदनी, हजरत मौलाना सनाउल्लाह अमृतसरी,

 हजरत मौलाना अब्दुल वहाब आरवी  और फिदा ए मिल्लत हजरत मौलाना असद मदनी पर एक कान्फ्रेंस दिल्ली में नवंबर के महीने में आयोजित की जाए इसके अलावा हजरत अल्लामा शाह मोइनुद्दीन अजमेरी पूर्व उपाध्यक्ष जमीयत उलेमा ए हिंद पर अजमेर शरीफ में सेमिनार आयोजित किया जाए. बैठक में शताब्दी वर्ष समारोह को सफल बनाने के लिए भी कई निर्णय लिए गए विशेषकर आर्थिक कमेटी गठित की गई जिसके कन्वीनर मौलाना नदीम सिद्दीकी महाराष्ट्र होंगे कमेटी में मौलाना बदरुद्दीन अजमल कासमी, मौलाना सिद्दीकुल्लाह   चौधरी, हाजी मोहम्मद हारुन भोपाल, मुफ्ती मोहम्मद सलमान मंसूरपुरी, मौलाना रफीक अहमद बडोदवी, मुफ्ती अहमद देवला शामिल हैं यह भी तय हुआ कि मौलाना हकीमुद्दीन कासमी शताब्दी वर्ष समारोह के सहयोगी कन्वीनर होंगे और देवबंद में शताब्दी वर्ष समारोह संपर्क कार्यालय भी स्थापित होगा. स्पष्ट रहे कि मुफ्ती मोहम्मद अफफान  मंसूरी शताब्दी समारोह के कन्वीनर हैं.

 बैठक में इसके अलावा देश के वर्तमान हालात  विशेषकर मॉब लिंचिंग जैसी अमानवीय घटनाओं पर भी चर्चा हुई सांप्रदायिक तत्व जिस तरह से भय और घृणा का वातावरण पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं उसने देश की पहचान को बुरी तरह से प्रभावित किया है यह महसूस किया जा रहा है कि अल्पसंख्यकों का एक बड़ा वर्ग बेचैन और भयभीत है, ऐसे हालात में जमीयत उलेमा ए हिंद इस कार्य को आवश्यक समझती है कि वह आपसी एकता शांति और भाईचारा को बढ़ावा देने के लिए अपनी परंपराओं के अनुसार व्यवहारिक रूप से सरगरम हो और न्याय प्रिय व प्रभावशाली देशवासियों के साथ मिलकर आपसी विश्वास का वातावरण स्थापित किया जाए इसी उद्देश्य के अंतर्गत 4 अगस्त 2019 को दिल्ली में शांति व एकता सम्मेलन के आयोजन का निर्णय लिया गया है इससे पहले 3 अगस्त को दिल्ली में जमीयत उलेमा ए हिंद की कार्यकारिणी का सम्मेलन होगा यह भी निर्धारित हुआ है कि ना सिर्फ दिल्ली में बल्कि मुंबई औरंगाबाद भोपाल जयपुर लखनऊ देहरादून पटना सहित बड़े शहरों में यह सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे
म्हणून 'तिने' स्वत:शीच लग्न केलं!

म्हणून 'तिने' स्वत:शीच लग्न केलं!


लंडन :- तरूण मुलींसमोर भारतात आणि इतर अनेक देशांमध्ये कायम करिअर आणि लग्न यापैकी एक पर्याय ठेवला जातो. अनेक मुली लग्नाचा पर्याय निवडून शिक्षण अर्धवट सोडून देतात. पण एक मुलगी अशी आहे जिने शिक्षणाच्या मार्गात कोणताच अडथळा यायला नको म्हणून स्वत:शीच लग्न केलंय.

स्वत:शीच लग्न करणाऱ्या या मुलीचं नाव आहे जेमिमा. जेमिमा ही युगान्डाची रहिवाशी असून सध्या ऑक्सफर्डमध्ये शिक्षण घेते आहे. ३२ वर्षांच्या जेमिमा मागे आई-वडिलांनी लग्नासाठी तगादा लावला होता. पण जेमिमाला लग्न करण्याची अजिबात इच्छा नव्हती. तिला संपूर्ण लक्ष तिच्या शिक्षणावर केंद्रित करायचं होतं. आई वडिलांचा लग्नाचा हट्ट आणि शिक्षणाची आकांक्षा अशा कात्रीत सापडलेल्या जेमिमाने एक तिसराच मार्ग निवडला.

तिने लग्नाची पत्रिका छापली. लंडनमधल्या आपल्या सगळ्या मित्रांना लग्नाला बोलावलं. इंग्लंडमधील परंपरेप्रमाणे लग्नासाठी दुचाकी गाडीही बोलावली. सगळे मित्र लग्नाला आले. पण लग्नात नवरदेव कुठेच नव्हता. अखेर ख्रिस्ती पद्धतीने स्वत:शीच लग्न केलं तेव्हा सगळे पाहून चाटच झाले. 'मी माझ्यासोबत आयुष्यभर राहीन' अशी शपथही तिने घेतली.

मी स्वत:साठी कशी सुयोग्य वर आहे याविषयावर लग्नानंतर तिने छोटसं भाषणही दिलं. लग्नाचं समारंभ संपल्यावर तिच्या मित्रांनी तिची योग्यप्रकारे पाठवणीही केली. जेमिमाच्या या लग्नामुळे तिचे आई-वडिल खुश झाले की नाही माहित नाही.पण सोशल मीडियावर मात्र जेमिमा सुपरहिट झाली आहे. तिच्या लग्नाचे फोटो आणि व्हिडिओ सध्या सोशल मीडियावर व्हायरल झाले आहेत

सध्या युरोपमध्ये स्वत:शीच लग्न करण्याचा ट्रेन्ड आला आहे. या लग्नांना सोलोगामी म्हटलं जातं. आई-वडिलांचा त्रास नको आणि कोणी पार्टनरही नको म्हणून लोक अशा प्रकारची लग्न करत आहेत.

दाऊद इब्राहिमचा 'हा' हस्तक भारतीय, पाकला झटका

दाऊद इब्राहिमचा 'हा' हस्तक भारतीय, पाकला झटका


बँकॉक :- अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिमचा एक जवळचा हस्तक पाकिस्तानी नसून भारतीय नागरिक असल्याचा निर्णय थायलंडच्या एका न्यायालयाने दिला आहे. सय्यद मुजक्किर मुद्दसर हुसैन ऊर्फ मोहम्मद सलीम ऊर्फ मुन्ना झिंगडा डी कंपनीचा एक महत्त्वाचा भाग आहे आणि दाऊद इब्राहिम आणि छोटा शकीलचा जवळचा आहे. पाकिस्तानला या न्यायालयाच्या निर्णयामुळे मोठा झटका बसला आहे.

मुन्ना झिंगडा बनावट पाकिस्तानी पासपोर्टवर बँकॉकला गेला होता. २००० सालापासून तो तेथील तुरुंगात आहे. त्याच्यावर दाऊदचा शत्रु छोटा राजनच्या हत्येचा कट रचण्याचा आरोप आहे. झिंगडाच्या पिता मुद्दसर हुसैन याचा १९९३ च्या मुंबई बॉम्बस्फोटात महत्त्वाचा सहभाग होता. त्याला पाकिस्तानची गुप्तचर संस्था ISI चं संरक्षण मिळालं आहे. थायलंडमधील पाकिस्तानी दूतावासाच्या माध्यमातून झिंगडाची शिक्षा कमी करण्याचे प्रयत्न करण्यात आले, त्यातही पाकिस्तान यशस्वी ठरलं. मुन्ना झिंगडाची शिक्षा यापूर्वीच कमी करून ३४ वर्षं करण्यात आली आहे.

यानंतर पुन्हा २०१६ मध्ये मुन्ना झिंगडाची शिक्षा कमी होऊन १८ वर्षांपर्यंत आली आहे. पाकिस्तानी अधिकारी शिक्षा कमी करण्याचे प्रयत्न एकीकडे करत असतानाच थायलंडसोबत प्रत्यार्पण करारांतर्गत मुन्नाच्या प्रत्यार्पणाचेदेखील प्रयत्न करत होते. पण भारताने याचा तीव्र विरोध करत मुन्ना झिंगडाच्या प्रत्यार्पणाचा दावा केला. हे प्रकरण अलीकडेच थायलंड कोर्टात पोहोचलं होतं.

दरम्यानच्या काळात, थायलंडच्या कायद्यानुसार, झिंगडाची सर्व शिक्षा माफ झाली आणि डिसेंबर २०१६ मध्ये त्याची सुटका होणार होती, पण हे प्रकरण विचाराधीन असल्याने त्याच प्रत्यार्पण झालं नाही. बुधवारी, कोर्टाने भारतातर्फे दिल्या गेलेल्या बोटांच्या ठशांच्या नमून्यांच्या आधारे झिंगडा भारतीय नागरिक असल्यावर शिक्कामोर्तब केले.

कोर्टाने पाकिस्तानलाही आपल्या थायलंडमधील दूतावासामार्फत या प्रकरणाचे पुरावे जमा करण्यास सांगितले आहेत. पाकिस्तानकडे अपील दाखल करण्यासाठी ३० दिवसांची मुदत आहे. अपील न केल्यास ९० दिवसांच्या आत झिंगडाला भारत प्रत्यार्पित करेल.

कोर्टात हाय व्होल्टेज ड्रामा

या प्रकरणाच्या सुनावणीदरम्यान कोर्टरुममध्ये नाट्यमय घटना घडल्याचे वृत्त आहे. निर्णय येताच झिंगडाने न्यायाधीशांना अपशब्द सुनावले. इतकेच नव्हे तर पाकिस्तानी दूतावासाच्या अधिकाऱ्यांनीही राग व्यक्त केला.
... म्हणून पासवानांनी मोदींविरोधात दंड थोपटले

... म्हणून पासवानांनी मोदींविरोधात दंड थोपटले




नवी दिल्ली :- शिवसेना आणि जेडीयूपाठोपाठ केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान यांच्या नेतृत्वाखालील लोकजनशक्ती पार्टीने केंद्रातील नरेंद्र मोदी सरकारविरोधात दंड थोपटले आहेत. सर्वोच्च न्यायालयाच्या माजी न्यायाधीशाला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरणाच्या अध्यक्षपदी म्हणून नियुक्त केल्याबद्दल लोजपाने विरोध केला आहे. एससी-एसटी कायदा कमकुवत केल्यामुळेच या न्यायाधीशाची राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरणाच्या अध्यक्षपदी नियुक्ती केल्याचा आरोप करत त्यांना या पदावरून हटविण्याची मागणी लोजपाने केली आहे.
रामविलास पासवान यांचे चिरंजीव चिराग पासवान यांनी पत्रकार परिषद घेऊन ही मागणी केली आहे. 'सर्वोच्च न्यायालयाचे माजी न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल यांनी एससी, एसटी अॅक्ट कमकुवत केला. त्यामुळेच निवृत्तीनंतर केंद्र सरकारने त्यांना बक्षिसी म्हणून न्यायाधिकरणाच्या अध्यक्षपदी नियुक्त केले आहे. त्यामुळे गोयल यांना अध्यक्षपदावरून तत्काळ हटविण्यात यावे. तसेच अध्यादेश काढून एससी-एसटी अॅक्ट पूर्ववत करावा. आमच्या या मागण्या मान्य न केल्यास येत्या ९ ऑगस्टपासून लोजपा आंदोलन करेल,' असा इशारा चिराग पासवान यांनी दिला आहे.
'गोयल यांना हटविण्यासाठी ९ ऑगस्ट रोजी दलित संघटनांकडून देशव्यापी निदर्शने करण्यात येणार आहेत. २ एप्रिल रोजी झालेल्या 'भारत बंद' पेक्षाही ही निदर्शने तीव्र असतील,' असा इशारा त्यांनी दिला. 'काही मुद्द्यांवर आम्ही भाजपला पाठिंबा दिला आहे. टीडीपीसारखं आम्ही एनडीएतून बाहेर पडणार नाही. आम्ही सरकारमध्ये राहून दलितांच्या हितासाठी आवाज उठवत राहू. आमच्या संयमाची परीक्षा पाहू नये. पंतप्रधानांनी त्यावर त्वरीत निर्णय घ्यावा,' असंही पासवान म्हणाले.
दरम्यान, पासवान यांच्या पाठोपाठ केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले यांनी गोयल यांना अध्यक्षपदावरून हटविण्याची मागणी केली आहे. याबाबत मोदींशी बोलणार असल्याचंही त्यांनी सांगितलं.